Viral Video : विदेशियों का भारत में बसने का मन मुख्य रूप से यहां की समृद्ध संस्कृति, कम जीवन यापन लागत, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में सुनहरे अवसर, और विविधतापूर्ण जीवनशैली के कारण करता है। इसके अलावा, भारत की आध्यात्मिक शांति, आतिथ्य सत्कार, और प्यार-मोहब्बत भी उन्हें यहां रुकने के लिए प्रेरित करती है। इन्हीं बातों पर प्रकाश डाला एक कनाडाई व्यक्ति ने जो पिछले आठ वर्षों से बेंगलुरु को अपना घर कह रहा है। इनके भारत में रहने का कारण बताने के बाद वायरल हो गया है। कैलेब फ्रीसेन ने हाल ही में अपने वीडियो में बताया कि उन्होंने भारत में रहना स्वयं चुना था और कई लोगों की आशंकाओं के बावजूद वे यहां अपने जीवन का आनंद ले रहे हैं। अब इनका ये वीडियो काफी वायरल हो रहा है।
इंस्टाग्राम पर वीडियो वायरल
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर caleb_friesen नामक हैंडल से शेयर किया गया है। फ्रीसेन ने बताया कि उनसे यह सवाल अक्सर पूछा जाता था, और ज्यादातर लोग यह मान लेते थे कि भारत में होने के पीछे उनका कोई गुप्त मकसद है। हालांकि, सच्चाई इससे कहीं ज्यादा सरल थी। वे बताते हैं कि, 'मुझे यह सवाल अक्सर सुनने को मिलता है। लोग पर्यटन के लिए भारत आना समझते हैं, वे किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी द्वारा कुछ वर्षों के लिए काम के लिए यहां भेजे जाने को समझते हैं, वे आत्म-मंथन को समझते हैं, लेकिन यहां रहना? 8+ वर्षों तक? एक सामान्य व्यक्ति की तरह? यह ऐसी बात है जिसे ज्यादातर लोग समझ नहीं पाते।' उन्होंने बताया कि भारतीयों के एक वर्ग के मन में अपने ही देश के प्रति एक छिपी हुई घृणा है जिसके कारण वे स्वदेशी उत्पादों से नफरत करते हैं। हालांकि, फ्राइसेन के ऐसे विचार नहीं थे।
'कनाडा-सिंगापुर में अच्छाई और बुराई दोनों'
फ्रीसेन बताते हैं कि, 'मैं उस पूर्वाग्रह को अपने साथ नहीं रखता। मेरा जन्म यहाँ नहीं हुआ था, और मैं उस तरह की सोच को आत्मसात करते हुए बड़ा नहीं हुआ। मेरे लिए, भारत जैसा है वैसा ही है। अच्छाई और बुराई दोनों। हर देश में दोनों होती हैं। कनाडा में अच्छाई और बुराई दोनों हैं। अमेरिका में अच्छाई और बुराई दोनों हैं। ब्रिटेन में अच्छाई और बुराई दोनों हैं। सिंगापुर में भी अच्छाई और बुराई दोनों थीं। गड्ढों से भरी सड़क को देखकर मुझे जो गुस्सा आता है, वही गुस्सा एक डच व्यक्ति को सड़क में एक छोटी सी दरार देखकर आता है। हर जगह की बुराई बराबर बुरी होती है, वस्तुनिष्ठ माप से नहीं, बल्कि मानवीय माप से।' फ्रीसेन ने कहा कि उन्होंने जहां भी रहे, आशावादी रहने का प्रयास किया, और भारत में भी यही स्थिति थी।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
इस वीडियो को देखने के बाद कई यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने लिखा कि, 'बहुत ही बढ़िया कहा। हम हाल ही में भारत आए हैं और बहुत से लोगों ने हमसे इसी तरह के सवाल पूछे और कहा कि हम एक बेहतर जीवन छोड़कर आए हैं।' दूसरे ने कहा कि, 'बिल्कुल सही कहा। आप जहां हैं वहीं खुश रहना चुनें।' तीसरे व्यक्ति ने कहा कि, 'एक अमेरिकी-भारतीय होने के नाते, जो 27 साल बाद भारत लौटा है और अब यहीं रह रहा है, मुझे कई भारतीयों से शत्रुता का सामना करना पड़ता है, जो यह नहीं समझते कि मैं वापस क्यों लौटा। फिर भी, मुझे यह जगह पसंद है, चाहे इसके अच्छे पहलू हों या बुरे।' चौथे यूजर ने लिखा कि, 'मैं एक कनाडाई हूं और पिछले 20 वर्षों में लगभग 10 वर्ष भारत में बिताए हैं। वर्तमान में जयपुर में रह रहा हूं। मुझे यहां की संस्कृति और लोग पसंद हैं। और हर दिन एक रोमांच होता है।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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