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पर्शिया से 'ईरान' कैसे बना ये देश, किसने दिया था ये नाम; जानिए इसका इतिहास

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Jun 11, 2026 12:27 pm IST,  Updated : Jun 11, 2026 12:27 pm IST

Iran History : सोशल मीडिया पर इन दिनों ईरान काफी ज्यादा ट्रेंड कर रहा है। वहां हो रही प्रत्येक गतिविधि पर दुनिया की नजरें हैं। मगर, क्या आपको इसका इतिहास पता है ?

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ईरान का इतिहास। Image Source : PEXELS

Iran History : विश्व इतिहास में 'पर्शिया' के नाम से प्रसिद्ध देश आज 'ईरान' के नाम से जाना जाता है। मगर क्या आपने कभी सोचा है कि, से नाम कब और ​आखिर क्यों बदला गया ? आखिर किसने इस मुल्क का नाम पर्शिया से ईरान किया ? आज हम आपको इन सबके बारे में बताने वाले हैं। दरअसल, यह नाम परिवर्तन 1935 में हुआ, लेकिन 'ईरान' नाम हजारों साल पुराना है। यह बदलाव रेज़ा शाह पहलवी द्वारा किया गया, जो देश की स्वदेशी पहचान को मजबूत करने और आधुनिक राष्ट्र-निर्माण का हिस्सा था।  

नाम की उत्पत्ति और इतिहास जानें 

ईरान शब्द मध्य फारसी 'एरान' से आया है, जिसका अर्थ है "आर्यों की भूमि।" यह पुरानी ईरानी भाषाओं से जुड़ा है, जो 'आर्य' को दर्शाता है। अवेस्ता ग्रंथों और अचमेनिद साम्राज्य के शिलालेखों में इसका उल्लेख मिलता है। तीसरी शताब्दी ई. में 'एरानशहर' का इस्तेमाल होता था। इसके विपरीत, 'पर्शिया' (Persia) एक बाहरी नाम है। यह दक्षिण-पश्चिम ईरान के 'पार्स' प्रांत से निकला, जहां अचमेनिद साम्राज्य की शुरुआत हुई। यूनानियों ने इसे 'पर्सिस' कहा, फिर रोमनों और यूरोपियों ने 'पर्शिया' अपनाया। ईरानियों ने खुद को हमेशा 'ईरानी' ही कहा। सन् 1935 में फारस आधिकारिक तौर पर 'ईरान' बन गया। यह परिवर्तन तत्कालीन शासक रज़ा शाह पहलवी द्वारा तय किया गया था। 21 मार्च 1935 को नवरोज के अवसर पर आयोजित एक समारोह में रज़ा शाह ने विदेशी प्रतिनिधियों से अनुरोध किया कि वे अपने सभी आधिकारिक पत्राचार में "फारस" के स्थान पर "ईरान" शब्द का प्रयोग करें।

1935 का क्यों बदला गया नाम 

1925 में रेज़ा खान ने कज्जार वंश को उखाड़ फेंका और पहलवी राजवंश की नींव रखी। आधुनिक सुधारों (शिक्षा, सेना, बुनियादी ढांचा) के साथ उन्होंने राष्ट्रीय पहचान मजबूत करने का फैसला किया। यही वजह है कि, रेज़ा खान ने इसका नाम बदला। इसके पीछे कुछ और भी उद्देश्य थे जैसे: 

  • पर्शिया' को कज्जार काल की कमजोरी, कर्ज और औपनिवेशिक छवि से जोड़कर भविष्य की ओर बढ़ना 
  • देश की प्राचीन आर्य जड़ों और सांस्कृतिक निरंतरता को उजागर करना 
  • आधुनिक राष्ट्र-राज्य के रूप में विश्व समुदाय में नई पहचान स्थापित करना

1959 में स्पष्टीकरण 

सूफी ईरान की रिपोर्ट के मुताबिक, रेज़ा शाह के बेटे मोहम्मद रेज़ा शाह ने 1959 में घोषणा की कि 'ईरान' और 'पर्शिया' दोनों का इस्तेमाल हो सकता है, लेकिन 'ईरान' आधिकारिक नाम बना रहा। आज संयुक्त राष्ट्र और विश्व में 'ईरान' ही मान्य है, जबकि साहित्य, कला और पश्चिमी संदर्भों में 'पर्शिया' अभी भी इस्तेमाल होता है (जैसे— पर्शियन गल्फ, पर्शियन कार्पेट)।

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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