Viral News: कॉरपोरेट जगत में आमतौर पर कर्मचारी छुट्टियां न मिलने के कारण खासे परेशान रहते हैं। ऐसे में किसी प्रियजन को खोने के बाद एक दिन की छुट्टी मांगना आम बात लगती है। मगर, एक भारतीय एजेंसी के कर्मचारी के लिए यह एक तनावपूर्ण अनुभव बन गया। रेडिट पर एक पोस्ट में मैनेजर के उस जवाब का खुलासा हुआ जिसने कई लोगों को हैरान कर दिया। पोस्ट के कैप्शन में लिखा है, 'क्या भारतीय मैनेजर बनने के लिए आपको अपनी आत्मा बेचनी पड़ती है?' कर्मचारी ने व्हाट्सएप पर हुई बातचीत का स्क्रीनशॉट रेडिट पर शेयर किया। जिसमें लिखा था— 'सुप्रभात महोदय, मेरे नाना का कल रात निधन हो गया, इसलिए वे आज ऑफिस नहीं आ पाऊंगा। इस पर बॉस के उत्तर ने यूजर्स को चौंका दिया, जिसमें यह दर्शाया गया कि कैसे कुछ दफ्तरों पर कर्मचारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे व्यक्तिगत आपात स्थितियों के दौरान भी लगातार उपलब्ध रहें।
मैनजर का अजब जवाब वायरल
सोशल मीडिया प्लेटाफॉर्म रेडिट पर @u/sanity-error-404 नामक हैंडल से पोस्ट की गई है। इसमें एक स्क्रीनशॉट में बॉस की ओर से लिखा गया है— 'यह सुनकर बहुत दुख हुआ। आज छुट्टी ले लीजिए। लेकिन आज हम कुछ क्लाइंट्स को ऑनबोर्ड कर रहे हैं। क्या आप इंडक्शन कॉल पर बने रह सकते हैं? व्हाट्सएप पर भी एक्टिव रहिए और ज़रूरत पड़ने पर डिज़ाइनर्स से संपर्क कीजिए।'कर्मचारी ने एजेंसी के कठिन माहौल का खुलासा किया है। दो सालों के दौरान, कंपनी ने बार-बार भूमिकाएं बदलीं, नौकरी के विवरण से परे काम जोड़े, और कम पैसों के कारण कर्मचारियों को निकालने के बाद काम का बोझ बढ़ा दिया। इन सबके बावजूद, कर्मचारी को टीम के साथ काम करने में मज़ा आया और उसने कभी कोई शिकायत नहीं की लेकिन व्यक्तिगत क्षति के दौरान ऑनलाइन रहकर काम निपटाने की मैनेजर की अपेक्षा बहुत ज्यादा साबित हुई।

कर्मचारी ने बयां किया दर्द
कर्मचारी ने लिखा, 'यह मेरी समस्या कैसे है कि आपके पास मेरे काम का ध्यान रखने वाला कोई और नहीं है? क्या मैनेजर भूल जाते हैं कि हम इंसान हैं, सिर्फ़ नतीजे देने वाली मशीनें नहीं?' रेडिट उपयोगकर्ताओं ने इस पोस्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिनमें से कई ने प्रबंधक की सहानुभूति की कमी की आलोचना की और इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे कुछ कार्यालयों में अत्यधिक काम के बोझ तले दबे कर्मचारियों से व्यक्तिगत संकट के दौरान भी उपलब्ध रहने की अपेक्षा की जाती है।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
एक यूजर ने लिखा कि, 'समस्या यह है कि लोग हर चीज़ को हल्के में लेते हैं। मैंने हमेशा हर चीज़ का विरोध किया है, यहाँ तक कि काम के घंटों से एक मिनट ज़्यादा समय का भी विरोध किया है।' दूसरे ने लिखा कि, 'इस समय, ईमानदारी से, बस एक अलग नौकरी की तलाश करें, और इस्तीफा देते समय, ईमेल में स्क्रीनशॉट डालें और उस पर सीईओ और प्रबंधन को चिह्नित करें।' तीसरे यूजर ने लिखा कि, "एक दिन की छुट्टी लेने के बाद कभी भी 'लेकिन' नहीं लगाना चाहिए।"
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पर किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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