Railway Facts : भारतीय ट्रेनों में सफर के दौरान आपने कई रेलवे द्वारा किए गए कई बदलावों को देखा और महसूस किया होगा। स्लीपर से लेकर अनुभूति और फर्स्ट एसी से लेकर थर्ड एसी तक कई तरह के कोच का रेलवे ने कायाकल्प कर दिया है। मगर, कुछ लोग सफर करते समय रेलवे के इन सराहनीय कार्यों को नहीं देख पाते। नतीजा, जानकारी के अभाव में यात्री कई तरह की सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। ऐसी ही एक सुविधा रेलवे एसी कोच में देता है जिसके बारे में शायद काफी कम लोगों को ही पता होगा। यदि आपने ट्रेन के एसी कोच की सीटों पर गौर किया होगा आपको सीटों पर उनके कवर के रंग जैसी एक एक्स्ट्रा चादर बिछी हुई मिली होगी। आज हम आपको बताते हैं कि, ट्रेन के एसी कोच में सीटों पर कवर के रंग जैसी एक एक्स्ट्रा चादर क्यों चढ़ी होती है।
रेडिट पर पूछा गया सवाल हुआ वायरल
दरअसल, इस सवाल को रेडिट पर r/indianrailways नामक हैंडल से शेयर किया गया था। तस्वीर में, यूजर फ्लैप को उठाता है जो केवल आधा सिला हुआ है और उंगलियों को अंदर डालने के लिए पर्याप्त जगह छोड़ता है। रेडिट पोस्ट में लिखा था, 'मैं लंबे समय बाद ट्रेन से यात्रा कर रहा हूं और सोच रहा हूं कि सीट पर यह अतिरिक्त परत क्यों दी गई है। आमतौर पर ऐसी चीजों का कोई न कोई उद्देश्य होता है, लेकिन अक्सर लोगों को इसके बारे में पता नहीं होता।'

आखिर क्यों बिछी होती है एक्स्ट्रा चादर
बता दें कि, जिस कवर जैसी चादर की बात हम कर रहे हैं उसे एसी कोचों में उपलब्ध बेडशीट को टिकाए रखने के लिए बनाया गया है।एसी कोच में आमतौर पर यात्रियों को दो चादरें और एक कंबल दिया जाता है। एक चादर सीट पर बिछाई जाती है और उसके कोनों को इस फ्लैप में दबाया जा सकता है ताकि यात्रियों के करवट बदलने या लेटने पर चादर फिसले नहीं।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
इस पोस्ट को देखने के बाद कई यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। कई यूजर्स ने टिप्पणी की कि उन्होंने कभी भी इस फ्लैप के उद्देश्य पर ध्यान नहीं दिया था। एक यूजर ने लिखा कि अपनी पिछली यात्रा के दौरान उन्होंने बस चादर को इसके ऊपर फैला दिया और यह बार-बार फिसलती रही। एक अन्य व्यक्ति ने मजाक में कहा कि वे भी उस फ्लैप के उद्देश्य से अनजान थे और इसी वजह से उनकी चादर कभी अपनी जगह पर नहीं टिकती थी जबकि दूसरों की टिक जाती थी।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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