1. Hindi News
  2. वायरल न्‍यूज
  3. ट्रेन के कोच पर M1 का बोर्ड क्यों लगा होता है, जान लीजिए नहीं तो पछताएंगे; ये रही डिटेल

ट्रेन के कोच पर M1 का बोर्ड क्यों लगा होता है, जान लीजिए नहीं तो पछताएंगे; ये रही डिटेल

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Apr 05, 2026 12:37 pm IST,  Updated : Apr 05, 2026 12:37 pm IST

Railway Facts : सोशल मीडिया पर आपने भारतीय रेलवे से जुड़े कई तरह के रोचक तथ्यों के बारे में पढ़ा होगा। मगर, आज हम आपको बताएंगे कि, ट्रेन के कोच पर M1 का बोर्ड क्यों लगा होता है ?

why m1 boards installed on train, Indian Railway, Indian Railway Facts, Interesting Facts, Railway F- India TV Hindi
ट्रेन के कोच पर लगा M1 का बोर्ड। Image Source : INDIAN RAIL INFO & PEXELS

Railway Facts : भारतीय रेलवे में ट्रेन के हर कोच पर अलग-अलग कोड जैसे S1, B1, A1, D1 आदि लिखे होते हैं। इन कोड्स का मतलब समझना टिकट चेक करने, कोच ढूंढ़ने और सुविधाओं का अंदाजा लगाने में बहुत मदद करता है। इन्हीं कोड्स में से एक है M1, M2 या M3। कई यात्री इसे देखकर कन्फ्यूज हो जाते हैं कि यह थर्ड एसी है या कुछ और इसी कन्फ्यूजन में कई बार गलत डिब्बे में चढ़ जाते हैं जिससे उनका नुकसान हो जाता​ है फिर वे पछताते हैं। दरअसल, M का मतलब है AC 3-Tier Economy या Third AC Economy क्लास। आइए समझते हैं इसके बारे में सब कुछ। 

क्या होता है ट्रेन का M1 कोच 

गौरतलब है कि, M1 कोच भारतीय रेलवे द्वारा 2021 के आसपास शुरू किया गया एक नया प्रकार का कोच है। इसे 3E (AC Three Tier Economy) भी कहा जाता है। यह सामान्य थर्ड एसी (3A) कोच से थोड़ा अलग है। मुख्य अंतर यह है कि इसमें बर्थ  की संख्या ज्यादा होती है। आमतौर पर एक कोच में 83 बर्थ तक हो सकती हैं, जबकि स्टैंडर्ड थर्ड एसी में लगभग 64-72 बर्थ होती हैं। ट्रेन के डिब्बे पर अगर M1, M2 या M3 लिखा दिखे तो समझ लीजिए कि यह थर्ड एसी इकोनॉमी क्लास का कोच है।  

थर्ड एसी से कैसे अलग है M1 कोच

बता दें कि, M1 कोच का किराया सामान्य थर्ड एसी से 6-8% कम होता है। इससे बजट में एसी सफर करना आसान हो जाता है। इसमें एयर कंडीशनिंग, बर्थ, लाइट, पंखे जैसी बेसिक सुविधाएं थर्ड एसी जैसी ही हैं, लेकिन कुछ कम्फर्ट कम हो सकता है। बर्थ का लेआउट थोड़ा कॉम्पैक्ट होता है ताकि ज्यादा यात्री बैठ सकें। साइड बर्थ वाले यात्रियों को कभी-कभी थर्ड एसी जैसा ही अनुभव होता है। थर्ड एसी से थोड़ा कम स्पेस और प्राइवेसी, लेकिन स्लीपर क्लास (SL) से काफी बेहतर। यह उन यात्रियों के लिए अच्छा विकल्प है जो एसी चाहते हैं लेकिन पूरा थर्ड एसी किराया नहीं देना चाहते। भारतीय रेलवे ने यह कोच इसलिए शुरू किया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग एसी सुविधा का लाभ ले सकें और ट्रेनों की कैपेसिटी बढ़ सके। आजकल कई लंबी दूरी की ट्रेनों जैसे राजधानी, शताब्दी या अन्य एक्सप्रेस में M1, M2 कोच देखने को मिलते हैं।

ट्रेन के कोच पर इन बोर्ड्स को भी समझें 

आमतौर पर सभी ट्रेनों के कोच पर कोई न कोई बोर्ड लगाया जाता है। कोच के बाहरी बोर्ड पर बड़े अक्षरों में कोड लिखे होते हैं ताकि प्लेटफॉर्म पर खड़े यात्री आसानी से अपना कोच पहचान सकें। रेलवे कर्मचारी और टीटीई भी इन कोड्स से ट्रेन की व्यवस्था मैनेज करते हैं। आइए जानते हैं ट्रेन के कोच पर कौन—कौन से बोर्ड देखने को मिलते हैं : 

  • S1, S2 : स्लीपर क्लास (Non-AC)
  • B1, B2 : थर्ड एसी (3A)
  • A1, A2 : सेकंड एसी (2A)
  • H1 : फर्स्ट एसी (1A)
  • D1 : चेयर कार (CC)
  • M1, M2, M3 : थर्ड एसी इकोनॉमी (3E)

इन बातों का रखें ध्यान 

टिकट बुक करते समय ऐप या वेबसाइट पर कोच टाइप पर यदि आपको M दिखे तो समझें कि यह इकोनॉमी थर्ड एसी है – सस्ता लेकिन एसी कम्फर्ट वाला। ज्यादा भीड़ होने पर इसमें थोड़ा क्राउडेड फील हो सकता है, इसलिए फैमिली या एल्डरली यात्रियों के लिए स्टैंडर्ड 3A बेहतर रह सकता है। M1 बोर्ड सिर्फ एक कोड नहीं, बल्कि रेलवे की मॉडर्नाइजेशन और यात्रियों को सस्ते एसी विकल्प देने की कोशिश का प्रतीक है। इससे रेलवे की आय बढ़ती है और आम आदमी को बेहतर सुविधा मिलती है।

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

ये भी पढ़ें -
Video : यूरोप में गन्ने के रस का ठेला देख चौंक गए भारतीय, रेसिपी और कीमत देखकर हंसी जरूर आएगी

Video : केरल की खूबसूरती देख विदेशी टूरिस्ट के उड़े होश, बोला- 'भारत को रीब्रांडिंग की जरूरत है'
 

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। वायरल न्‍यूज से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।