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पश्चिम बंगाल में SIR का खौफ... 'वोटर लिस्ट से नाम हटने के डर से' एक और शख्स ने लगाई फांसी

 Published : Nov 05, 2025 08:51 pm IST,  Updated : Nov 05, 2025 08:51 pm IST

मृतक की पत्नी ने बताया कि शफीक-उल-गाजी वैध पहचान पत्र न होने से भयभीत थे। वह बार-बार कहते थे कि उन्हें देश से बाहर निकाल दिया जाएगा। डर की वजह से वह बीमार पड़ गए थे।

प्रतीकात्मक तस्वीर- India TV Hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर Image Source : PTI

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के कारण कथित तौर पर भयभीत अधेड़ उम्र के एक व्यक्ति ने बुधवार को आत्महत्या कर ली। तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया कि SIR के डर से राज्य में आत्महत्या की यह 8वीं घटना है। मृतक की पहचान शफीक-उल-गाजी के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उत्तर 24 परगना के घुसिघाटा का निवासी था और पिछले कुछ महीने से भांगड़ के जयपुर इलाके में अपनी ससुराल के मकान में रह रहा था।

वैध पहचान पत्र न होने से भयभीत था शख्स

परिवार के सदस्यों के अनुसार, गाजी को कुछ महीने पहले एक दुर्घटना में चोट आई थीं और तब से वह मानसिक रूप से परेशान था। राज्य में SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद से उसकी चिंता बढ़ गई थी। मृतक की पत्नी ने बताया, "वह वैध पहचान पत्र न होने से भयभीत थे। वह बार-बार कहते थे कि उन्हें देश से बाहर निकाल दिया जाएगा। डर की वजह से वह बीमार पड़ गए थे। आज सुबह चाय पीने के बाद वह बकरियों को बांधने गए और बाद में हमने उन्हें बकरी के बाड़े में गमछे से बनाए गए फंदे लटके हुए पाया।"

TMC ने बीजेपी पर लगाया  "दहशत पैदा करने" का आरोप

इस घटना ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर SIR के माध्यम से "दहशत पैदा करने" का आरोप लगाया है। शोक संतप्त परिवार से मिलने पहुंचे कैनिंग ईस्ट से टीएमसी के विधायक शौकत मुल्ला ने कहा कि वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के निर्देश पर वहां गए थे। मुल्ला ने आरोप लगाया, "मंगलवार तक एसआईआर प्रक्रिया के डर से सात लोगों की मौत हो चुकी थी। अब भांगड़ में आत्महत्या करने वाला व्यक्ति भी इस सूची में शामिल हो गया है। यह गरीब लोगों को डराने और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने की भाजपा की साजिश के कारण हो रहा है।"

BJP ने क्या कहा?

हालांकि, भाजपा ने आरोपों को "राजनीति से प्रेरित नाटक" बताकर खारिज कर दिया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा, "एसआईआर मतदाता सूचियों को अद्यतन करने के लिए पूरे भारत में आयोजित एक नियमित निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया है। टीएमसी इन मौत के आंकड़ों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए और भाजपा को बदनाम करने के लिए कर रही है। कानून-व्यवस्था राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, हमारी नहीं।" निर्वाचन आयोग ने अब तक इस घटना पर कोई टिप्पणी नहीं की है। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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