तृणमूल कांग्रेस में बगावत के बाद आज पहली बार ममता बनर्जी एक्टिव नजर आईं। ममता ने पार्टी के विधायकों और सांसदों की मीटिंग बुलाई, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के 78 में से सिर्फ 8 विधायक और 42 सांसदों में से सिर्फ 6 सांसद ही मीटिंग में पहुंचे। मीटिंग में ममता ने पार्टी को री-स्ट्रक्चर करने का फैसला किया। अपने भरोसेमंद नेताओं को पार्टी में बड़े-बड़े पद दिए। अभिषेक बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के महासचिव बने रहेंगे, लेकिन उनके साथ डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन को ज्वाइंट सेक्रेट्री की जिम्मेदारी दी गई है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रतो बख्शी को हटा कर उनकी जगह चंद्रिमा भट्टाचार्य को स्टेट प्रेसिडेंट बनाया गया है।
पार्टी में किए कई बदलाव
सयानी घोष को टीएमसी यूथ विंग की कमान दी गई है, जबकि वुमन विंग की जिम्मेदारी माला राय को मिली है। मदन मित्रा को ट्रेड यूनियन की कमान दी गई है। ममता बनर्जी ने डेरेक ओ ब्रायन और कल्याण बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया है, जबकि कुणाल घोष के साथ तीन दूसरे नेता, प्रदेश प्रवक्ता होंगे। मीटिंग खत्म होने के बाद कल्याण बनर्जी ने कहा कि बीजेपी के इशारे पर तृणमूल कांग्रेस विधायक दल में तोड़फोड़ की गई है। स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को लीडर ऑफ अपोजिशन बनाकर इल्लीगल काम किया है। तृणमूल कांग्रेस स्पीकर के फैसले के खिलाफ कोर्ट में लड़ेगी।
कल्याण बनर्जी ने ऋतब्रत पर साधा निशाना
बागी विधायकों की बयानबाजी पर कल्याण बनर्जी ने कहा कि जो लोग आज इधर-उधर की बातें कर रहे हैं, वो स्पीकर के पास जाने से पहले दीदी से बात कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। कल्याण बनर्जी ने कहा कि जो लोग आज खुद को ममता से बड़ा नेता समझ रहे हैं, वो एक बार अपने अपने क्षेत्र में जाएं, अपने नाम पर चुनाव लड़कर दिखाएं, उन्हें अपनी हैसियत का अंदाजा हो जाएगा। वहीं कल्याण बनर्जी को ऋतब्रत गुट के विधायक प्रसून बनर्जी ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी ने विधायकों के जाली सिग्नेचर के जरिए लीडर ऑफ अपोजिशन का प्रोसेस ही फंसा दिया था। अगर ऋतब्रत बनर्जी वक्त रहते कदम न उठाते, 60 विधायक मिलकर विपक्ष का नया नेता न चुनते, तो ये पद भी तृणमूल कांग्रेस के हाथ से निकल जाता।
बैठक में पहुंचे सिर्फ 8 विधायक और 6 सांसद
वैसे पता तो ये भी लगा है कि आज ममता बनर्जी ने कुछ बागी विधायकों से संपर्क किया था, उन्हें मनाने की कोशिश की थी, लेकिन बात नहीं बनी, इसीलिए मीटिंग में सिर्फ 8 विधायक और 6 सासंद ही पहुंचे। इसके बाद ये चर्चा भी शुरू हो गई कि अभी कुछ और विधायक ममता का साथ छोड़ सकते हैं और सासंद भी पाला बदल सकते हैं। इस पर मदन मित्रा से सवाल पूछे गए, तो मदन मित्रा ने कहा कि आज नेशनल वर्किंग कमेटी की मीटिंग थी। कुछ नेता वर्चुअली जुड़े, जबकि कुछ नेता बाहर होने की वजह से नहीं आ पाए, इसलिए नेताओं की गैर-मौजूदगी बड़ी बात नहीं है। पार्टी में अब सब ठीक है और जो चीजें ठीक नहीं है, उन्हें जल्द दुरुस्त कर लिया जाएगा।
23 सांसदों का गुट तैयार?
मदन मित्रा कुछ भी कहें, लेकिन बंगाल में ये चर्चा जोरों पर है कि तृणमूल सांसद भी बगावत की तैयारी में हैं। 23 सांसदों का गुट तैयार हो चुका है, जो अभिषेक बनर्जी को अपना नेता मानने के लिए तैयार नहीं है। आज बंगाल के विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद क्या करेंगे, इसकी ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन कुछ तो हो रहा है और क्या हो रहा है वो जल्दी पता लग जाएगा। 23 सांसदों की बगावत पर कल्याण बनर्जी से भी सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये हवा हवाई बातें हैं। इनका सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है। तृणमूल के सांसद ममता के साथ हैं और ममता ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं।
ममता का सपोर्ट करेंगे हुमायूं कबीर?
सबसे हैरान करने वाला बयान आया हुमायूं कबीर का सामने आया। हुमायूं कबीर ने आज ममता बनर्जी को रेजीनगर से चुनाव लड़ने का ऑफर दिया। हुमायूं कबीर दो सीटों से चुनाव जीते थे। उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ दी है, इसलिए वहां बाई-इलेक्शन होने हैं। इस सीट से हुमायूं कबीर ने अपने बेटे को चुनाव लड़ाने का एलान किया है, लेकिन आज उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी उनसे रिक्वेस्ट करें, तो वो अपने बेटे को मैदान से हटा लेंगे। ममता बनर्जी का सपोर्ट करेंगे और उन्हें रेजीनगर से चुनाव जिताकर विधानसभा में भेजेंगे।
ममता को तृणमूल बिखरने का डर
ममता बनर्जी को ये बात कितनी चुभती होगी कि जिस हुमायूं कबीर को उन्होंने पार्टी से निकाला वो आज अपनी सीट ममता को ऑफर कर रहे हैं। दीदी को अहसास है कि तृणमूल कांग्रेस बिखरने लगी है। जब बैठक बुलाती हैं तो न विधायक आते हैं न सांसद। ममता ने पार्टी-संगठन में बदलाव किए हैं, ताकि पार्टी पर कंट्रोल बना रहे, क्योंकि जगह-जगह कार्यकर्ता जनता के गुस्से से घबराकर तृणमूल छोड़कर भाग रहे हैं। अगर लोकसभा के सांसद भी साथ छोड़ गए, तो ममता के लिए ये बड़ा शर्मिंदगी भरा एहसास होगा।
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