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पश्चिम बंगाल में रहस्यमयी बीमारी से 3 मरीजों की मौत, 4 बच्चों का अस्पताल में चल रहा इलाज

 Published : Jan 30, 2025 06:58 pm IST,  Updated : Jan 30, 2025 07:05 pm IST

रहस्यमयी बीमारी गुलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) का कहर अब पश्चिम बंगाल में भी देखने को मिल रहा है। बंगाल में इस बीमारी से तीन लोगों की जान चली गई है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : ANI

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में पिछले चार दिन में संदिग्ध गुलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) से एक बच्चे सहित तीन लोगों की मौत हो गई। हालांकि राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक मौत के कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। तीनों व्यक्तियों की मौत कोलकाता और हुगली जिले के सरकारी अस्पतालों में हुई। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कि पश्चिम बंगाल में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की कोई बात नहीं है।

इन जगहों के रहने वाले थे मृतक

सूत्रों ने बताया कि मृतकों में उत्तर 24 परगना जिले के निवासी देबकुमार साहू (10), अरित्रा मनाल (17) और हुगली जिले के धनियाखली गांव निवासी 48 वर्षीय एक व्यक्ति शामिल हैं। उन्होंने बताया कि देबकुमार की 26 जनवरी को कोलकाता के बीसी रॉय अस्पताल में मौत हो गई, जबकि शहर के एनआरएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज करा रहे अमदंगा के किशोर की अगले दिन मौत हो गई। हुगली जिले के व्यक्ति की बुधवार को वहां के एक अस्पताल में मौत हो गई। 

कोलकाता में भी एक छात्र की मौत

जानकारी के अनुसार, कोलकाता में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के संदिग्ध मामले से 17 वर्षीय एक लड़के की मौत हो गई। डॉक्टरों को संदेह है कि जीबीएस अंतर्निहित स्थिति हो सकती है। पिछले कुछ दिनों में देश भर में ऑटोइम्यून बीमारी के कई मामले सामने आए हैं।

चार बच्चों का अस्पताल में चल रहा इलाज

इस बीच, सूत्रों ने बताया कि संदिग्ध जीबी सिंड्रोम से पीड़ित चार और बच्चों का बीसी रॉय अस्पताल एवं बाल स्वास्थ्य संस्थान में इलाज किया जा रहा है। फिलहाल गुलियन-बैरे सिंड्रोम को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। 

स्वास्थ्य विभाग ने की हाई लेवल मीटिंग

स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें राज्य के सभी सरकारी और जिला अस्पतालों को जीबीएस के किसी भी मामले की तुरंत विभाग को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया। अस्पतालों को प्लाज्मा थेरेपी, वेंटिलेशन सपोर्ट सिस्टम और अंतःशिरा इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन सहित आवश्यक उपचारों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और इन उपचारों के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचा बनाए रखने का भी निर्देश दिया गया।

इनपुट- भाषा  

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