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Ranibandh Assembly Election: रानीबांध में जीत की हैट्रिक लगाएगी टीएमसी या बीजेपी बदल देगी तस्वीर, जानें चुनावी समीकरण

Edited By: Shakti Singh Published : Feb 28, 2026 10:56 pm IST, Updated : Feb 28, 2026 10:56 pm IST

Ranibandh Assembly Election: रानीबांध में पिछले दो चुनाव टीएमसी ने जीते हैं, लेकिन बीजेपी का वोट प्रतिशत भी लगातार बढ़ा है। 2021 की जीत 2016 की तुलना में छोटी थी। ऐसे में 2026 में बाजी पलट सकती है।

Ranibandh Assembly Election 2026- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV रानीबांध विधानसभा चुनाव 2026

Ranibandh Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल की रानीबांध सीट पर इस बार का चुनाव काफी रोचक होने वाला है। यह आदिवासी बहुल सीट लंबे समय तक लेफ्ट पार्टियों का गढ़ रही है, लेकिन अब यहां की तस्वीर बदल चुकी है। इस चुनाव में यहां पहली बार बीजेपी को जीत मिल सकती है। पिछले दो चुनाव से यह सीट टीएमसी के खाते में जा रही है, लेकिन बीजेपी का वोट शेयर लगातार बढ़ा है। ऐसे में टीएमसी के लिए जीत आसान नहीं होगी। 

इस सीट पर आखिरी चुनाव 2024 में हुए थे। तब टीएमसी ने बढ़त हासिल की थी। इससे पहले 2021 में भी टीएमसी ने जीत हासिल की थी। हालांकि, पिछले एक दशक में बीजेपी का वोट बैंक इस सीट पर तेजी से बढ़ा है। ऐसे में एसआईआर में मतदाताओं की संख्या में कटौती के बाद यहां के समीकरण बदल सकते हैं। फर्जी मतदाता हटने से किसी फायदा होगा। यह कहना मुश्किल है।

पिछले चुनाव के नतीजे

1962में बनी इस सीट पर 15 विधानसभा चुनाव हुए हैं। सबसे ज्यादा नौ बार सीपीआईएम को जीत मिली है। कांग्रेस और टीएमसी ने दो-दो बार यहां से जीत हासिल की है। हालांकि, कांग्रेस ने लंबे समय से यहां कोई चुनाव नहीं जीता है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी का यहां कोई जनाधार नहीं है। असली मुकाबला राज्य की अन्य सीटों की तरह बीजेपी और टीएमसी के बीच है। सबसे ज्यादा बार जीत हासिल करने वाली सीपीआईएम का भी यहां वोट बैंक बेहद कम है।

क्या हैं समीकरण?

लोकसभा चुनाव के नतीजे देखें तो 2024 में इस सीट से टीएमसी को बढ़त मिली थी। वहीं, 2019 में बीजेपी ने बढ़त हासिल की थी। 2014 में टीएमसी ने सीपीआईएम और 2009 में सीपीआईएम ने कांग्रेस को हराया था। इससे साफ होता है कि अब यहां के मतदाता टीएमसी और बीजेपी में शिफ्ट हो चुके हैं। ऐसे में इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर रह सकती है। पुराने नतीजों के आधार पर टीएमसी का पलड़ा भारी कहा जा सकता है, लेकिन ट्रेंड बीजेपी के पक्ष में जा रहे हैं।

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