Raniganj Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसके लिए सभी राजनीतिक दल तैयारियों में जुट चुके हैं। माना जा रहा है कि राज्य में अप्रैल महीने में वोटिंग कराई जा सकती है। ऐसे समय में सभी की नजरें राज्य की प्रमुख विधानसभा सीटों पर है। पश्चिम बंगाल की सत्ता को देखते हुए रानीगंज विधानसभा सीट काफी अहम मानी जाती है। रानीगंज निश्चित रूप से पश्चिम बंगाल के सबसे हाई-वोल्टेज चुनावी मुकाबलों में से एक होगा। ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या है इस सीट का सियासी समीकरण।
रानीगंज विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले में आती है। यह जनरल कैटेगरी की सीट है। 1951 में बनी रानीगंज, आसनसोल लोकसभा सीट के सात हिस्सों में से एक है। यह 1957 में कुछ समय के लिए चुनावी नक्शे से गायब हो गई थी लेकिन 1962 के चुनावों से लगातार इसका नाम रहा है। यह लंबे समय से भारतीय लेफ्ट का गढ़ रहा है। CPI ने 1962 में यह सीट जीती थी, जबकि CPI(M) ने 1977 से 2006 तक लगातार यहां 11 जीत हासिल कीं।
इसके बाद TMC ने 2011 में यह सिलसिला तोड़ा लेकिन CPI(M) ने 2016 में एक बार फिर सीट वापस ले ली। फिर 2021 में तृणमूल सत्ता में वापस आ गई। रानीगंज के बदलते चुनावी मूड और कम अंतर से करीबी मुकाबले के इतिहास को देखते हुए इस बार के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच दिलचस्प मुकाबला होने की उम्मीद है।
साल 2021 के विधानसभा चुनावों में इस सीट से तृणमूल कांग्रेस के तापस बनर्जी ने जीत हासिल की। तापस बनर्जी ने बीजेपी की उम्मीदवार बिजन मुखर्जी को 3556 वोटों से हराया था। तापस बनर्जी को 78,164 वोट मिले जबकि बिजन मुखर्जी को 74,608 वोट मिले थे।
2016 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान रानीगंज सीट पर CPI(M) की रुनु दत्ता की जीत हुई थी। रुनु दत्ता ने तृणमूल की नरगिस बानो को 12,385 वोटों से हरा दिया था। रुनु दत्ता को 74,995 वोट मिले थे तो नरगिस बानो को 62,610 वोट प्राप्त हुए थे। वहीं, बीजेपी के मनीष शर्मा तीसरे स्थान पर रहे थे, उन्हें 32,214 वोट मिले थे।
संपादक की पसंद