पश्चिम बंगाल एसएससी भर्ती संकट को लेकर सोमवार को बर्खास्त शिक्षकों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान बर्खास्त शिक्षण और गैर शिक्षण कर्मचारियों के एक ग्रुप ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। इसके बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा तक विरोध मार्च निकाला। बर्खास्त शिक्षकों के ग्रुप ने मलिक स्क्वायर से विधानसभा तक मार्च निकाला, जबकि दूसरा गुट शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु को ज्ञापन सौंपने के लिए राज्य शिक्षा विभाग मुख्यालय विकास भवन की ओर बढ़ा। बता दें कि इस प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने एसएससी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितता के कारण अपनी नौकरी गंवा दी है।
बर्खास्त शिक्षकों के इस गुट का नेतृत्व कर रहे 'डिजर्विग टीचर्स राइट फोरम' के एक सदस्य ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा, "हमें नयी भर्ती परीक्षा में बैठने के लिए कहकर राज्य सरकार ने वस्तुतः उन पात्र शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए मौत के वारंट पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिन्हें उच्चतम न्यायालय के आदेश द्वारा अमान्य कर दिया गया था।" बता दें कि इससे पहले भी कई बार शिक्षकों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा चुका है। बीते दिनों प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों और पुलिस के बीच झड़प भी देखने को मिली थी, जिसके बाद बंगाल पुलिस द्वारा शिक्षकों पर लाठीचार्ज किया गया था।
पश्चिम बंगाल में SSC भर्ती घोटाले को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अनियमितताओं के चलते 25,000 से अधिक शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नौकरियां रद्द कर दी थीं। इस फैसले से हजारों लोग बेरोजगार हो गए थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को कुछ राहत दी है, लेकिन गैर-शिक्षण कर्मचारियों को कोई राहत अबतक नहीं मिली। ऐसे में राज्य सरकार ने इन कर्मचारियों को भत्ता देने का फैसला किया है, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति को कुछ सहारा मिल सके। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ग्रुप C कर्मचारियों को हर महीने 25,000 रुपये और ग्रुप D कर्मचारियों को 20,000 रुपये भत्ता देने का ऐलान किया है। वहीं इस मामले में राज्य सरकार ने गैर-शिक्षण कर्मचारियों, जैसे कि नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका भी दायर की है।
(इनपुट-भाषा)
संपादक की पसंद