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पश्चिम बंगाल: SIR के बाद महिला मतदाताओं की संख्या में आई कमी, कड़े मुकाबलों में होगा खेल, जानिए क्या बोले एक्सपर्ट?

Edited By: Dhyanendra Chauhan @dhyanendraj Published : Mar 08, 2026 08:53 pm IST, Updated : Mar 08, 2026 08:58 pm IST

पश्चिम बंगाल में SIR के बाद मतदाता सूची में बड़ा बदलाव आया है, जिसमें महिला मतदाताओं की संख्या में पुरुषों की तुलना में कमी देखी गई है। राज्य में एसआईआर प्रक्रिया नवंबर 2025 से शुरू हुई और फरवरी 2026 में अंतिम सूची जारी हुई।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : PTI सांकेतिक तस्वीर

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने एक नया राजनीतिक आयाम जोड़ दिया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि पुरुष मतदाताओं की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या में मामूली कमी आई है। विश्लेषकों का कहना है कि यह बदलाव करीबी मुकाबले वाले निर्वाचन क्षेत्रों में परिणामों को प्रभावित कर सकता है। राज्य के लगभग आधे मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला मतदाता, जो पुरुषों की तुलना में अधिक संख्या में मतदान करने निकलती हैं। पिछले एक दशक में राज्य की राजनीति में सबसे निर्णायक चुनावी समूह के रूप में उभरी हैं। 

वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास कर रही बीजेपी

एकजुट रूप से मतदान करने के पैटर्न, मतदान में लगातार वृद्धि और कल्याणकारी योजनाओं पर आधारित राजनीतिक लामबंदी के साथ, महिला मतदाता मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चुनावी जीत में अहम भूमिका निभाती रही हैं। ऐसे में भाजपा इस वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास कर रही है।

 महिला मतदाताओं की संख्या लगभग 3.44 करोड़

एसआईआर के बाद के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में महिला मतदाताओं की संख्या लगभग 3.44 करोड़ है, जो नवंबर में प्रक्रिया शुरू होने पर 3.77 करोड़ थी। वहीं, पुरुष मतदाताओं की संख्या 3.89 करोड़ से घटकर 3.60 करोड़ रह गई है। कुल मिलाकर, राज्य के 7.04 करोड़ मतदाताओं में से लगभग आधी महिलाएं हैं। महिला मतदाताओं की संख्या में 8.7 प्रतिशत की कमी आई है, जो पुरुष मतदाताओं की संख्या में लगभग 7.5 प्रतिशत की गिरावट से मामूली रूप से अधिक है। 

2021 में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 81.75 रहा

पिछले दो दशकों के मतदान के आंकड़े महिलाओं के बढ़ते राजनीतिक महत्व को रेखांकित करते हैं। 2006 में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 80.75 था, जो 2011 में बढ़कर 84.45 प्रतिशत हो गया, 2016 में 94.42 प्रतिशत तक पहुंच गया और 2021 में एक बार फिर पुरुषों की भागीदारी से थोड़ा अधिक रहा, जहां महिलाओं का मतदान प्रतिशत 81.75 था, जबकि पुरुषों का 81.37 प्रतिशत था। 

TMC को महिलाओं के 50% से अधिक वोट मिले

बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के सर्वेक्षण-आधारित अनुमानों से पता चलता है कि ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस ने महिलाओं के 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए, जबकि भाजपा ने लगभग 37 प्रतिशत वोट प्राप्त किए। 

जानिए क्या बोले राजनीतिक पंडित?

राजनीतिक विश्लेषक बिश्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा, 'महिला मतदाताओं की संख्या में किसी भी प्रकार की कमी, भले ही वह मामूली हो, उन सीटों पर असर डाल सकती है, जहां कड़ी टक्कर होती है और जहां मतदान में अंतर अक्सर नतीजों को निर्धारित करता है।' राजनीतिक विश्लेषक सुमन भट्टाचार्य ने कहा, 'बंगाल में महिला मतदाता अब हाशिए पर रहने वाली भागीदार नहीं हैं; वे राज्य में सबसे एकजुट चुनावी समूह बन गई हैं। कल्याणकारी योजनाओं, प्रत्यक्ष नकद अंतरण और सशक्तीकरण की भावना ने महिला मतदाताओं और राज्य सरकार के बीच एक मजबूत राजनीतिक संबंध स्थापित किया है।' 

अर्थशास्त्रियों ने इस प्रवृत्ति को 'दीदी प्रभाव' बताया है, जिसमें ममता बनर्जी की व्यक्तिगत लोकप्रियता और महिला-केंद्रित कल्याणकारी कार्यक्रमों की साझा भूमिका है। एक विश्लेषक ने कहा, 'इन योजनाओं ने निम्न आय वर्ग की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। जब वित्तीय सहायता सीधे महिलाओं तक पहुंचती है, तो अक्सर इसका राजनीतिक रूप से सीधा असर पड़ता है।'

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