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ग्लोबल साउथ में और बजेगा भारत का डंका, दक्षिण अफ्रीका ने पीएम मोदी के दोस्त रामफोसा को फिर चुना अपना राष्ट्रपति

 Published : Jun 15, 2024 10:43 am IST,  Updated : Jun 15, 2024 10:45 am IST

सीरिल रामफोसा को फिर से दक्षिण अफ्रीका का राष्ट्रपति चुना गया है। रामफोसा भारत और पीएम मोदी के अच्छे मित्रों में हैं। इससे माना जा रहा है कि ग्लोबल साउथ के देशों में भारत की स्थिति और अधिक मजबूत होगी। भारत जी-20 से ही ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर उभरा है। पीएम मोदी ने इटली में चल रहे जी7 में भी ग्लोबल साउथ की आवाज उठाई है।

सीरिल रामफोसा, दक्षिण अफ्रीका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति। - India TV Hindi
सीरिल रामफोसा, दक्षिण अफ्रीका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति। Image Source : REUTERS

जोहानिसबर्ग: दक्षिण अफ्रीका ने राष्ट्रपति चुनावों में इतिहास लिख दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोस्त सीरिल रामफोसा को दक्षिण अफ्रीका ने एक बार फिर से अपना राष्ट्रपति चुना है। इससे दक्षिण अफ्रीका समेत ग्लोबल साउथ के देशों में भारत की स्थिति और अधिक मजबूत होनी तय मानी जा रही है। बता दें कि दक्षिण अफ्रीका में दो सप्ताह पहले हुए आम चुनावों में अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस (एनएनसी) को 40 प्रतिशत मत हासिल हुए इसके बावजूद देश की संसद ने पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए सिरिल रामफोसा को राष्ट्रपति चुन लिया है।

इससे पहले दिन में एएनसी के थोको डिडिजा को अध्यक्ष और ‘डेमोक्रेटिक अलायंस’ (डीए) की एनेली लोट्रिएट को उपाध्यक्ष चुना गया। माना जा रहा है कि बुधवार को शपथ ग्रहण के बाद रामफोसा अपने नए मंत्रिमंडल की घोषणा करेंगे। शुक्रवार आधी रात उन्हें राष्ट्रपति चुना गया और इसके साथ ही तमाम अटकलों पर भी विराम लग गया। इससे पहले शुक्रवार सुबह 10 बजे शुरू हुए सत्र में राष्ट्रीय एकता सरकार (जीएनयू) के गठन, बार-बार व्यवधान तथा लंबी मतदान प्रक्रिया को लेकर चर्चा हुई। एएनसी ने डीए, इंकाथा फ्रीडम पार्टी (आईएफपी) और पैट्रियटिक फ्रंट (ओएफ) के साथ गठबंधन किया है।

दक्षिण अफ्रीका की राजनीति में नए युग की शुरुआत

कुछ लोगों ने इस गठबंधन को दक्षिण अफ्रीका की राजनीति में एक नए युग के रूप में स्वागत किया जो सुलह का एक मजबूत संदेश देगा और अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। हालांकि, कई लोगों ने कहा कि एएनसी ने डीए के साथ गठबंधन करके देश के नागरिकों को धोखा दिया है। डीए पहले विपक्ष में था तथा उसने 1994 में नेल्सन मंडेला के नेतृत्व में एएनसी के पहली बार सत्ता में आने के बाद से ही उसकी नीतियों का विरोध किया है। एएनसी के सेक्रेटरी जनरल फिकिले मबालुला ने संसद में मतदान जारी रहने के दौरान एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हमें 60 लाख लोगों ने वोट दिया है और जनता चाहती है कि हम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए परिवर्तनकारी एजेंडे पर काम करना जारी रखें।’ (भाषा) 

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