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200 रुपये के लिए मर्डर, कोर्ट ने 31 साल बाद तीन दोषियों को रिहा करने का दिया आदेश

 Edited By: Amar Deep
 Published : Dec 13, 2024 11:37 pm IST,  Updated : Dec 13, 2024 11:37 pm IST

31 साल पुराने एक मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने हत्या के तीन दोषियों को रिहा करने का निर्देश दिया है।

झारखंड हाई कोर्ट ने दिया रिहा करने का आदेश।- India TV Hindi
झारखंड हाई कोर्ट ने दिया रिहा करने का आदेश। Image Source : REPRESENTATIVE IMAGE

रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने तीन दशक बाद एक मामले पर अपना फैसला सुनाया है। इसमें 200 रुपये के लिए हत्या करने वाले तीन दोषियों को हाई कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दिया है। बता दें कि देवघर जिले में मात्र 200 रुपये के विवाद में हत्या के मामले में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अब झारखंड हाई कोर्ट ने तीनों दोषियों को तीन दशक से अधिक समय बाद रिहा करने का आदेश दिया। तीनों दोषियों किशन पंडित, जमदार पंडित और लखी पंडित की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें 31 साल की मुकदमेबाजी के बाद मामले से मुक्त कर दिया। 

1993 में हुई थी हत्या

अपील के लंबित रहने के दौरान एक अन्य दोषी लखन पंडित की मौत भी हो गई थी। पूरा मामला तीन दिसंबर 1993 का है, जब जसीडीह थाना क्षेत्र में 200 रुपये की मामूली रकम को लेकर विवाद हो गया था। इस दौरान लखन ने कृषि कार्य के लिए नुनु लाल महतो से यह रकम उधार ली थी, लेकिन वह उचित समय के भीतर कर्ज चुकाने में विफल रहा। जब नुनु लाल महतो ने कर्ज चुकाने के लिए उससे संपर्क किया, तो दोनों के बीच विवाद बढ़ गया जिसके बाद नुनु लाल महतो पर आरोपियों ने हमला किया, जिससे उनकी मौत हो गई। नुनु लाल महतो का बेटा भैरव इस घटना का चश्मदीद था। 

कोर्ट ने 31 साल बाद सुनाया फैसला

इसके बाद, तीनों दोषियों- किशन पंडित, जमदार पंडित और लखी पंडित को 6 जून 1997 को देवघर की सत्र अदालत ने दोषी करार दिया। इसके खिलाफ पटना हाई कोर्ट में अपील की गई, जिसने अभियुक्तों को जमानत दे दी। बाद में राज्य के विभाजन के बाद, 2000 में मामले को नवगठित झारखंड हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। तब से, यह मामला तीन दशकों से अधिक समय तक अधर में लटका रहा। वहीं अब अपील पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोषियों को रिहा करने का निर्देश दिया। इसके अलावा आजीवन कारावास की सजा को उनके द्वारा पहले से हिरासत में बिताई गई अवधि में बदल दिया। (इनपुट- एजेंसी)

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