सूडान में हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कुछ समय से जारी हिंसा में 800 आम नागरिकों को मौत के घाट उतारा जा चुका है। इन सभी नागरिकों की मौत मिलिशियाई लड़ाकों के हमले में हुई है। संयुक्त राष्ट्र ने इस हिंसा में हो रही आम नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता जाहिर की है।
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सूडान शहर में हुए हमले का एक दृश्य।
मिलिशियाई लड़ाकों ने सूडान के दारफुर शहर में मौतों का तांडव मचा दिया है। सूडान के युद्ध प्रभावित दारफुर शहर पर अर्धसैनिक बलों और उनकी सहयोगी अरब मिलिशिया के लड़ाकों द्वारा कई दिनों से हमलों किए जा रहे हैं। इस हमले में अब तक 800 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। संयुक्त राष्ट्र ने यह जानकारी दी। बता दें कि सूडान की सेना और अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के बीच पिछले कई महीनों से युद्ध जारी है। इसमें लगातार आम नागरिक भी मारे जा रहे हैं। बच्चों, बूढ़ों और महिलाओं की भी नहीं बख्शा जा रहा है।
इस महीने की शुरुआत में पश्चिम दारफुर प्रांत में अरदामाता को निशाना बनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत दर्ज की गई। सैन्य प्रमुख जनरल अब्देल-फतह बुरहान और आरएसएफ के कमांडर जनरल मोहम्मद हमदान डागालो के बीच जारी तनाव युद्ध में बदल गया। इसके बाद से ही अप्रैल के मध्य से सूडान में ऐसे हालात बने हुए हैं।
सूडान में तख्तापलट के बाद से जारी है युद्ध
तख्तापलट के बाद से ही सूडान युद्ध की चपेट में आ गया था। यहां तब से लगातार हिंसा हो रही है। ये हिंसक घटनाएं 2019 में एक सैन्य विद्रोह के बाद निरंकुश शासक उमर अल-बशीर को सत्ता से बेदखल करने के बाद से हो रही हैं। अल-बशीर के तख्तापलट के 18 महीने बाद युद्ध का दौर शुरू हो गया। संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर ने बताया कि दारफुर में कथित तौर पर 800 से अधिक लोग मारे गए हैं और लगभग 8,000 लोग पड़ोसी देश चाड में चले गए हैं। हालांकि, एजेंसी का कहना है कि चाड में भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। (एपी)
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