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इज़रायल से संप्रभु राज्य की मान्यता मिलने के बाद रोशनी से नहाया सोमालीलैंड, नेतन्याहू को क्यों हुआ इस मुस्लिम देश से लगाव?

Written By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia Published : Dec 29, 2025 12:32 pm IST, Updated : Dec 29, 2025 12:32 pm IST

इज़रायल से संप्रभु राज्य की मान्यता मिलने के बाद सोमालीलैंड रविवार की रात दूधिया रोशनी से जगमगा उठा। 99 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले सोमालीलैंड से बेंजामिन नेतन्याहू के खास लगाव ने इस्लामिक संघ से लेकर अरब लीग तक को परेशान कर दिया है।

सोमालीलैंड में जश्न।- India TV Hindi
Image Source : X@SLNTV सोमालीलैंड में जश्न।

हरगेइसा: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के एक चौंकाने वाले फैसले ने इस्लामिक संघ से लेकर अरब लीग समेत कई मुस्लिम राष्ट्रों में खलबली मचा दी है। इजरायल ने अफ्रीकी महाद्वीप से जुड़े मुस्लिम देश सोमालीलैंड को संप्रभु राज्य की मान्यता देकर सबको चौंका दिया है। नेतन्याहू को आखिर इस मुस्लिम राष्ट्र से इतना अधिक लगाव क्यों हुआ, इसके पीछे इजरायल की क्या रणनीति है?...यह सब भी आपको बताएंगे। मगर इजरायल के इस फैसले से सोमालीलैंड जश्न में डूबा है। रविवार की रात पूरा सोमालीलैंड दूधिया रोशनी में नहा उठा। 

इजरायल ने 26 दिसंबर को दी मान्यता

इजरायल ने गत 26 दिसंबर को एक ऐतिहासिक फैसले में सोमालीलैंड को संप्रभु राज्य की मान्यता देकर सबको हैरान कर दिया। इसके साथ ही इजरायल सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र और संप्रभु राज्य के रूप में औपचारिक मान्यता देने वाला दुनिया का पहला संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश बन गया। इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमालीलैंड के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही के साथ वीडियो कॉल पर बातचीत के दौरान इसकी घोषणा की और संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। यह कदम अब्राहम समझौतों की भावना में उठाया गया है, जो 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में इज़रायल और कई अरब देशों के बीच सामान्यीकरण समझौतों का हिस्सा था। 

कहां है सोमालीलैंड

99 फीसदी मुस्लिम आबादी (सुन्नी मुस्लिम) वाला यह देश अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में स्थित है। यह राष्ट्र 1991 में सोमालिया से अलग होकर स्वतंत्रता की घोषणा कर चुका था। तब से यह क्षेत्र अपनी मुद्रा, पासपोर्ट, पुलिस और लोकतांत्रिक चुनाव प्रणाली के साथ डी फैक्टो स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है, लेकिन अब तक किसी भी यूएन सदस्य देश से मान्यता नहीं मिली थी। सोमालीलैंड की राजधानी हरगेइसा में इस घोषणा के बाद जबरदस्त उत्सव मनाया गया। शहर की इमारतों पर इज़रायली झंडे प्रोजेक्ट किए गए, आतिशबाजी हुई और हजारों लोग सड़कों पर उतरकर सोमालीलैंड के झंडे लहराते हुए नाचते-गाते दिखे। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं जहां शहर रोशनी से जगमगाया नजर आ रहा है, लोग खुशी से चिल्ला रहे हैं और इसे अपने देश की लंबी संघर्ष की जीत बता रहे हैं। सोमालीलैंड के राष्ट्रपति अब्दुल्लाही ने इसे "ऐतिहासिक क्षण" करार दिया और कहा कि उनका देश अब्राहम समझौतों में शामिल होने को तैयार है, जो क्षेत्रीय शांति और समृद्धि को बढ़ावा देगा।

इजरायल ने क्यों दी सोमालीलैंड को मान्यता

इज़रायल के लिए यह फैसला रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। सोमालीलैंड की स्थिति अदन की खाड़ी पर है, जो लाल सागर का प्रवेश द्वार है। इससे इज़रायल को यमन के हूती विद्रोहियों पर निगरानी और उन पर जवाबी हमले करना आसान हो सकते हैं। नेतन्याहू ने कहा कि दोनों देश कृषि, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था में तत्काल सहयोग बढ़ाएंगे। सोमालीलैंड मुस्लिम बहुल देश है, जहां सुन्नी इस्लाम प्रमुख है, लेकिन यह अपेक्षाकृत उदारवादी और स्थिर माना जाता है। नेतन्याहू को इस देश से खास लगाव इसलिए है, क्योंकि यह मुस्लिम दुनिया में इज़रायल के लिए एक नया सहयोगी बन सकता है। अब्राहम समझौतों की तरह, यह इज़रायल की मुस्लिम देशों के साथ सामान्यीकरण की नीति का विस्तार है। सोमालीलैंड में अल-शबाब जैसे चरमपंथी ताकतों का प्रभाव कम है, जो इज़रायल के लिए आकर्षक है। इसके अलावा, मॉसाड की वर्षों की गुप्त भागीदारी इस मान्यता की पृष्ठभूमि में रही है। हालांकि, इस फैसले ने क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है। 

अरब लीग और इस्लामिक संघ में बौखलाहट

इजरायल के इस फैसले से अरब लीग से लेकर इस्लामिक संघ तक में भारी बौखलाहट है। वहीं सोमालिया ने इसे अपनी संप्रभुता पर "खुला आक्रमण" बताते हुए कड़ी निंदा की और इज़रायल को "दुश्मन" करार दिया। सोमालिया के राष्ट्रपति हसन शेख मोहम्मद ने संसद के आपात सत्र में कहा कि यह सोमालिया की संप्रभुता का सबसे बड़ा उल्लंघन है। अफ्रीकी संघ (एयू), अरब लीग, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल और इस्लामिक कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन ने भी इजरायल द्वारा दी गई मान्यता को खारिज कर दिया और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। मिस्र, तुर्की, सऊदी अरब, जिबूती और कई अन्य देशों ने सोमालिया की एकता का समर्थन किया। 

34 साल बाद मिली किसी देश को मान्यता

एयू ने चेतावनी दी कि इजरायल के इस फैसले से महाद्वीप में अलगाववाद को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि सोमालीलैंड के लिए यह मान्यता एक मील का पत्थर है। 34 साल बाद पहली बार किसी बड़े देश से मान्यता मिलने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों, ऋण और निवेश के दरवाजे खुल सकते हैं। नेतन्याहू ने राष्ट्रपति अब्दुल्लाही को इज़रायल आमंत्रित किया है। यह कदम इज़रायल की मुस्लिम दुनिया में पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है, जहां सोमालीलैंड जैसे स्थिर सहयोगी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। कुल मिलाकर, यह घटना हॉर्न ऑफ अफ्रीका और मध्य पूर्व की भू-राजनीति को नया आकार दे सकती है, लेकिन विवादों से घिरी हुई है।

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