जोहान्सबर्ग:दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने शनिवार को जोहान्सबर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि देशों के अंदर और देशों के बीच धन एवं विकास की असमानता अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य है। यह वैश्विक प्रगति की सबसे बड़ी बाधा है। लगभग 40 राष्ट्राध्यक्षों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि टिकाऊ भविष्य के लिए आर्थिक, लैंगिक, नस्लीय और भौगोलिक विभाजनों को समाप्त करना जरूरी है।
जी-20 के केंद्र में होनी चाहिए ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताएं
रामाफोसा ने जोर दिया कि जी-20 के संस्थापक सदस्य के रूप में दक्षिण अफ्रीका ने यह सुनिश्चित किया है कि ग्लोबल साउथ और अफ्रीकी महाद्वीप की विकास प्राथमिकताएं इस समूह के एजेंडे के केंद्र में रहें। उन्होंने कहा, “यह केवल अफ्रीका और ग्लोबल साउथ के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। इससे संसाधनों पर दबाव कम होगा, प्रवासन को बेहतर ढंग से प्रबंधित किया जा सकेगा और संघर्ष का खतरा घटेगा। ”राष्ट्रपति ने कहा कि जी-20 स्थिरता पर ध्यान देता है, क्योंकि इससे निवेश आकर्षित होता है और वैश्विक आर्थिक झटकों का जोखिम कम होता है।
साझा भविष्य को खतरे में डाल रहे भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष
रामफोसा ने चेतावनी दी कि भू-राजनीतिक तनाव, जलवायु परिवर्तन, महामारियां, ऊर्जा व खाद्य असुरक्षा, बेरोजगारी, गरीबी और सशस्त्र संघर्ष हमारे साझा भविष्य को खतरे में डाल रहे हैं। इसलिए हमें सभी को साथ लेकर चलना होगा और प्रमुख बाजारों को प्राथमिकता देनी होगी, क्योंकि वे नवाचार और क्षमता बढ़ाते हैं। मजबूत अर्थव्यवस्था लोगों को गरीबी से बाहर निकालती है तथा निवेश और व्यापार को बढ़ावा देती है। इसलिए हमें संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को 2030 तक हासिल करने की गति तेज करनी होगी।”(भाषा)