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क्या जुड़ सकेंगे कटे हुए सिर? दुनिया का पहला ‘सिर प्रत्यारोपण’ सिस्टम आया सामने, Brain Bridge के दावे ने चौंकाया

 Written By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Nov 28, 2025 08:58 pm IST,  Updated : Nov 28, 2025 08:59 pm IST

क्या भगवान गणेश की तर्ज पर अब आम इंसानों का कटा हुआ सिर जोड़ना भी संभव हो सकेगा?...यह सुनकर आपको भले अजीब लग रहा हो, लेकिन अमेरिका की न्यूरोसाइंस और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग कंपनी ब्रेन ब्रिज ने दुनिया का सिर प्रत्यारोपण सिस्टम विकसित करने का दावा किया है।

कटे सिर को जोड़ता एआई रोबोट (प्रतीकात्मक फोटो)- India TV Hindi
कटे सिर को जोड़ता एआई रोबोट (प्रतीकात्मक फोटो) Image Source : X@SHININGSCIENCE

दुबई: दुनिया का पहला सिर प्रत्यारोपण करने वाले वैज्ञानिक भगवान शंकर को माना जाता है। उन्होंने अपने बेटे श्री गणेश का सिर कट जाने पर उन्हें एक हाथी का सिर लगा दिया था। भारत के पौराणिक दस्तावेंजों के अनुसार यह दुनिया का पहला और आखिरी सिर प्रत्यारोपण माना जाता है। मगर दावा किया जा रहा है कि गणेश भगवान की तर्ज पर इंसानों के कटे हुए सिर को भी जोड़ा जा सकेगा। इतना ही नहीं एक इंसान का कटा हुआ सिर दूसरे इंसानों में प्रत्यारोपित किया जा सकेगा। यह सुनकर आपको भले भरोसा नहीं हो रहा हो, लेकिन अमेरिका की न्यूरोसाइंस और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग कंपनी ब्रेन ब्रिज ने दुनिया का सिर प्रत्यारोपण सिस्टम विकसित करने का दावा किया है।

 

क्या प्रत्यारोपित हो सकेंगे कटे हुए सिर

 ब्रेन ब्रिज के दावे के अनुसार अब वह दिन दूर नहीं, जब इंसान का सिर एक शरीर से निकालकर दूसरे स्वस्थ शरीर पर जोड़ा जा सकेगा।  BrainBridge ने दुनिया का पहला हेड एंड फेस ट्रांसप्लांट सिस्टम पेश किया है, जो पूरी तरह रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित है। कंपनी के अनुसार, यह तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो सकती है, जिनका शरीर अंतिम चरण के कैंसर, पूर्ण लकवा (क्वाड्रीप्लेजिया), या अल्जाइमर-पार्किंसन जैसी लाइलाज बीमारियों से बर्बाद हो चुका है, लेकिन दिमाग पूरी तरह स्वस्थ है। 

 

कैसे प्रत्यारोपित होगा कटा हुआ सिर

ब्रेन ब्रिज के अनुसार कैंसर, लकवा, अल्जाइमर व पार्किंसन जैसी बीमारियों से पीड़ित ऐसे मरीजों का सिर एक मृत दाता के स्वस्थ शरीर पर प्रत्यारोपित किया जा सकेगा, यानी उन्हें जीवन का दूसरा मौका मिलेगा। सिर प्रत्यारोपण का कार्य आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस (एआई) की मदद से रोबोटिक सर्जरी द्वारा किया जाएगा।

 

कैसे काम करेगा BrainBridge?

दो हाई-स्पीड रोबोटिक आर्म्स एक साथ मरीज का सिर और दाता का शरीर तैयार करेंगे।

एआई रियल-टाइम में नसों, रक्त वाहिकाओं और स्पाइनल कॉर्ड की मिलीसेकंड-स्तरीय मैपिंग करेगा।
माइक्रो-सर्जरी की सटीकता इतनी होगी कि नसें और धमनियां बिना किसी रिसाव के जुड़ सकें।
चेहरा भी पूरी तरह ट्रांसप्लांट होगा, ताकि मरीज की पहचान बनी रहे।


प्रत्यारोपण के दौरान मस्तिष्क को दी जाती रहेगी पूरी आक्सीजन

कंपनी का दावा है कि पूरी प्रक्रिया में मस्तिष्क को ऑक्सीजन और पोषण की निरंतर आपूर्ति बनी रहेगी, जिससे ब्रेन डेड का खतरा शून्य होगा। हालांकि इस दावे पर जहां एक तरफ वैज्ञानिक समुदायों में उत्साह है, तो वहीं नैतिकता के सवाल भी तेज हो गए हैं:

  • क्या सिर बदलने के बाद भी वही “इंसान” रहेगा?
  • दाता शरीर की सहमति और पहचान का क्या होगा?
  • अमीरों के लिए “अमरता” की दुकान न बन जाए?

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह कॉन्सेप्ट स्टेज पर है। पहले जानवरों पर प्रयोग होंगे, फिर दशक भर बाद इंसानों पर ट्रायल शुरू हो सकता है। फिर भी BrainBridge के प्रमुख हाशिम अल-गैलानी ने कहा, “हम साइंस-फिक्शन को हकीकत में बदल रहे हैं।” एक बात साफ है कि चिकित्सा विज्ञान ने वह सीमा पार कर ली है जो कल तक असंभव लगती थी। अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि यह हो सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि हमें इसे होने देना चाहिए या नहीं। 

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