नई दिल्ली: बालाकोट में भारतीय विमानों के हमले के बाद पाकिस्तान अलग-थलग पड़ने लगा है। भारत, रूस और चीन की आरआईसी बैठक के बाद चीन ने भी पाकिस्तान से अपना पल्ला झाड़ते हुए और भारत का सहयोग करते हुए कहा, 'हम आतंकवाद और कट्टरपंथ की जमीन को खत्म करने में सहयोग करेंगे।' इसी के साथ राजनयिकों ने यह भी कहा कि पुलवामा हमले के बाद हो सकता है कि चीन पाकिस्तान को किसी तरह की कोई सहायता ना दे। साथ चीन यह भी कह सकता है कि वह पाकिस्तान को केवल आर्थिक मोर्चे पर लिमिटेड साथ दे सकता है।
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इससे पहले चीन ने मंगलवार को भारत और पाकिस्तान से ‘संयम बरतने’ का आह्वान किया और भारत से कहा था कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई अंतरराष्ट्रीय सहयोग से संचालित करे। चीन की यह टिप्पणी पाकिस्तान में आतंकवादी संगठन जैशे मोहम्मद के सबसे बड़े शिविर पर भारतीय लड़ाकू विमानों की ओर से आज तड़के किये गये हमले के कुछ घंटे बाद आई। पाकिस्तान में आतंकवादी शिविरों पर भारत के हवाई हमलों के संबंध में चीन की प्रतिक्रिया पूछे जाने पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने यहां मीडिया से कहा, ‘‘हमने संबंधित खबरें देखी हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं कहना चाहता हूं कि भारत और पाकिस्तान दोनों दक्षिण एशिया में महत्वपूर्ण देश हैं। दोनों के बीच सौहार्द्रपूर्ण संबंध और सहयोग दोनों देशों के साथ ही दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता के भी हित में है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि भारत और पाकिस्तान संयम बरतेंगे तथा अपने द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए और प्रयास करेंगे।’’
एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले पर बात की है। प्रवक्ता ने कहा, ‘‘फोन कॉल के दौरान वांग ने मुद्दों पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री की बात और प्रस्तावों को ध्यानपूर्वक सुना और अपना यह विचार दोहराया कि दोनों पक्षों को क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए आतंकवाद से मुकाबले में अपना सहयोग आगे बढ़ाने की जरूरत है।’’