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ताइवेन स्ट्रेट से होकर गुजरा अमेरिकी नेवी का जहाज तो भड़का चीन, दिया बड़ा बयान

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : May 19, 2021 12:15 pm IST,  Updated : May 19, 2021 12:15 pm IST

चीन ने बुधवार को हाल ही में ताइवान स्ट्रेट से होकर अमेरिकी नौसेना के एक जहाज के गुजरने का विरोध किया और इसे उकसावे वाला कदम करार दिया।

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चीन ने बुधवार को हाल ही में ताइवान स्ट्रेट से होकर अमेरिकी नौसेना के एक जहाज के गुजरने का विरोध किया। Image Source : AP REPRESENTATIONAL

बीजिंग: चीन ने बुधवार को हाल ही में ताइवान स्ट्रेट से होकर अमेरिकी नौसेना के एक जहाज के गुजरने का विरोध किया और इसे उकसावे वाला कदम करार दिया। ड्रैगन ने कहा कि अमेरिकी नौसेना के जहाज ने ताइवान स्ट्रेट से गुजरकर क्षेत्र में शांति और स्थिरता को प्रभावित किया है। अमेरिकी नौसेना के 7वें बेड़े ने कहा कि निर्देशित मिसाइल विध्वंसक यूएसएस कर्टिस विल्बर अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार मंगलवार को एक नियमित दौरे पर ताइवान स्ट्रेट से गुजरा। यह मार्ग ‘एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अमेरिकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।’

‘हम कानूनों के मुताबिक संचालन जारी रखेंगे’

अमेरिका की नेवी ने एक बयान में कहा, ‘अमेरिकी सेना अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार कहीं भी उड़ान, समुद्र में जहाज का संचालन करना जारी रखेगी।’ यह जलडमरूमध्य क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में आता है, जबकि चीन स्व-शासित ताइवान को उसका क्षेत्र होने का दावा करता है और इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की उपस्थिति को द्वीप की लोकतांत्रिक सरकार के प्रति समर्थन का प्रदर्शन मानता है। रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर एक बयान में, पूर्वी थिएटर कमांड के प्रवक्ता कर्नल झांग चुनहुई ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई ताइवान के स्वतंत्र बलों को गलत संकेत भेज रही है।

चीन ने कहा, हमने सख्ती से पहरा दिया
कर्नल चुनहुई ने कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई साथ ही जानबूझकर क्षेत्रीय स्थिति को प्रभावित कर रही है और पूरे ताइवान स्ट्रेट में शांति और स्थिरता को खतरे में डाल रही है। उन्होंने कहा कि चीनी बलों ने जहाज पर नजर रखी और उसकी निगरानी की और सभी खतरों तथा उकसावे के खिलाफ सख्ती से पहरा दिया। बता दें कि बीते कुछ महीनों में चीन और अमेरिका के रिश्तों में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान काफी खटास आई थी और जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद भी दोनों देशों के रिश्तों में सुधार देखने को नहीं मिला है।

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