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दक्षिण एशिया में आधिपत्य जमाने वाली नीतियां शांति के खतरे के लिये जिम्मेदार: पाक

 Edited By: India TV News Desk
 Published : Aug 23, 2017 01:26 pm IST,  Updated : Aug 23, 2017 01:26 pm IST

आतंकवादियों के लिये पनाहगाह मुहैया कराने के आरोपों से इनकार करते हुए पाकिस्तान ने कहा है कि भौगोलिक वैश्विक राजनीति के जटिल पारस्परिक प्रभाव और आधिपत्य जमाने वाली नितियों का अनुसरण दक्षिण एशिया में शांति एवं स्थिरता के खतरे के लिये जिम्मेदार है।

pak said Lawmakers in South Asia are responsible for the...- India TV Hindi
pak said Lawmakers in South Asia are responsible for the threat of peace

इस्लामाबाद: आतंकवादियों के लिये पनाहगाह मुहैया कराने के आरोपों से इनकार करते हुए पाकिस्तान ने कहा है कि भौगोलिक वैश्विक राजनीति के जटिल पारस्परिक प्रभाव और आधिपत्य जमाने वाली नितियों का अनुसरण दक्षिण एशिया में शांति एवं स्थिरता के खतरे के लिये जिम्मेदार है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आतंकवादियों के समर्थन को लेकर पाकिस्तान की आलोचना की थी, जिसके बाद पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा कि जम्मू कश्मीर विवाद का अनसुलझा रहना क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिये प्रमुख बाधा बना हुआ है। पाकिस्तान की ओर से देर रात की गयी यह प्रतिक्रिया अफगानिस्तान एवं व्यापक दक्षिण एशिया क्षेत्र पर ट्रम्प की नयी नीति की घोषणा के बाद आयी है। अपनी घोषणा में ट्रम्प ने भारत से यह अपील की थी कि वह युद्धग्रस्त देश में अपनी भूमिका में और इजाफा करे और आतंकवादी समूहों को पनाह मुहैया कराने के लिये पाकिस्तान को चेतावनी दी थी। (नेपाल के प्रधानमंत्री देउबा भारत के लिए रवाना)

विदेश कार्यालय ने कहा कि अफगानिस्तान एवं दक्षिण एशिया में नयी अमेरिकी रणनीति पर बीती रात कैबिनेट के साथ हुई बैठक में चर्चा हुई और प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी एक व्यापक नीतिगत प्रतिक्रिया के तहत 24 अगस्त को राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक के दौरान इस मुद्दे को उठायेंगे। अपनी शुरुआती प्रतिक्रिया में उसने पाकिस्तान ने इन आरोपों पर निराशा जाहिर की। इसने कहा, दुनिया में कोई भी देश आतंकवाद के अभिशाप से पाकिस्तान से अधिक ग्रस्त नहीं है, जिन्हें अक्सर हमारी सीमाओं से बाहर अंजाम दिया जाता है। इसलिए यह खेदजनक है कि अमेरिकी नीति के बयान में इसके खिलाफ आतंकवाद के खिलाफ प्रयास के तहत पाकिस्तानी राष्ट्र द्वारा किये गये बलिदानों की अनदेखी की गयी।

विदेश कार्यालय ने कहा, पनाहगाहों के संदर्भ में झूठे कथनों पर भरोसा करने के बजाय अमेरिका को आतंकवाद के खात्मे के लिये पाकिस्तान के साथ काम करने की आवश्यकता है। इसमें कहा गया कि शांति एवं सुरक्षा के लिये खतरे को जटिल वैकि नीतियों के पारस्परिक प्रभाव, कटुता उत्पन्न करने वाले विवादों और आधिपत्य जमाने वाली नीतियों का अनुसरण करने की नीति से अलग-थलग नहीं किया जा सकता। उसने दोहराया कि अफगानिस्तान संकट का कोई विशेष सैन्य समाधान नहीं है। इसके अनुसार, पाकिस्तान अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिये अफगानिस्तान के नेतृत्व में बातचीत के जरिये किये जाने वाले समाधान का समर्थन करता है। इसने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को हराने के लिये अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ काम करने के लिये प्रतिबद्ध है और देश आतंकवाद-रोधी प्रयासों का हिस्सा लगातार बना रहेगा।

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