आज इस्लामाबाद में बलोचों के साथ भी वही हुआ जो 1971 में बंगालियों के साथ हुआ था लेकिन नेशनल मीडिया, लेकिन पंजाबी मीडिया, लेकिन रियासती मीडिया लगातार खामोश है। बलोच मां वहां पर रोती रहीं, बिलखती रहीं, गुहार लगाती रहीं, विनती करती रहीं लेकिन इस्लामाबाद में किसी ने नहीं सुनी।
बलूचिस्तान से 900 किलोमीटर चल कर बलोच क्रांतिकारी इस्लामाबाद पहुंच गई हैं। लेकिन शहबाज शरीफ सामने नहीं आ रहे। फील्ड मार्शल आसिम मुनीर जवाब देने नहीं आ रहा। बल्कि पुलिस को भेज कर बलोच महिलाओं को इस्लामाबाद से निकालने की कोशिश हो रही है। जब डंडे से काम नहीं बना तो सड़क को जेल बना दिया गया है।
बलोचों का प्रदर्शन, डरी शहबाज सरकार
इस्लामाबाद की सड़कों पर बैठी महिलाओं की तादाद भले ही कम हो लेकिन इन्होंने शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की नींदे उड़ा दी हैं। दोनों इन महिलाओं के प्रोटेस्ट से डर गए हैं। इनके रास्ते बंद करा दिए गए हैं। कैंप लगाने की इजाजत नहीं दी गई है। यहां तक महिला पुलिसकर्मियों की मदद से इनके साथ बदसलूकी भी कराई जा रही है।
6 दिन से धूप में बारिश में ये महिलाएं धरने पर बैठी हैं। इस्लामाबाद की सड़क पर बैठी किसी मां का बेटा 10 साल से गायब है। किसी बहन का भाई 15 साल से लापता है। कई बेटियां ऐसी हैं, जिन्हें अपने पिता का चेहरा भी याद नहीं है। कोई पत्नी सालों से अपने पति का इंतजार कर रही है। इन सारी महिलाओं का एक ही गुनहगार है- आसिम मुनीर, जो बलूचिस्तान में रातो रात किसी भी घर से किसी के भी पिता, भाई और बेटो को अगवा कर लेते हैं।
फौज की करतूत, लापता हजारों बलोच
एक बलोच महिला ने बताया, ''मैं महमूद अली की मां हूं...मेरे बेटे को 18 जून 2024 को पाकिस्तान की एजेंसीज और CTD ने लापता किया...एक साल का वक्त गुजर चुका है...मगर हमें पता नहीं कि वो कहां हैं...और किस हाल में है... एक साल के दौरान मैंने कई बार प्रदर्शन किए और अपने इलाके में रोज 4 घंटे अपना रोड ब्लॉक किया..मगर वहां के अधिकारियों ने हमें झूठी तसल्लियां देकर हमें उठाया कि आपके लिए करेंगे मगर उसके बाद कोई भी नहीं आया।''
एक बच्ची ने आपबीती सुनाते हुए कहा, ''मैं लापता जांजी बलूच की बेटी हूं। मेरे पिता को पिछले 10 सालों से लापता किया है CTD ने हमारे घर से, क्वेटा से और रात के 3 बजे हमारे घर में CTD, सिविल वर्दी में पुलिस, FC हमारे घर में आए थे। उस वक्त मैं 3 महीने की थी..मगर अब मैं 10 साल की हूं मगर अभी तक मेरे पिता नहीं मिले। मैंने अपने पिता का चेहरा तक नहीं देखा।''
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1 महीने में 1000 लोग गायब
बलूचिस्तान की बेटियां तेज बारिश और इस्लामाबाद प्रशासन के अत्याचारों के बावजूद टिकी हुई हैं क्योंकि वो अपने परिजनों को एक बार देखना चाहते हैं। बलूचिस्तान के मानवाधिकार विभाग 'पांक' की एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ पिछले एक महीने में एक हजार लोग गायब हो चुके हैं। पाकिस्तानी सेना का दावा है कि ये लोग लापता हुए हैं। लेकिन दुनिया जानती है कि बलोचों को उनके घर से कौन उठा रहा है, कौन उन्हे गिरफ्तार कर रहा है और जेलों में डाल रहा है।
बलोच लोगों के लिए अलग टॉर्चर सेल
बलूचिस्तान के लोगों पर अत्याचार करने के लिए पाकिस्तान की आर्मी ने अलग टॉर्चर सेल बनाया हुआ है। यहां पाकिस्तानी सेना बिजली के झटके देने से लेकर बेरहमी से पीटने तक, शारीरिक और मानसिक यातना देने में कोई कसर नहीं छोड़ती। पहले पाकिस्तानी हुक्मरानों ने बलूचिस्तान में जुल्म किए। अब जब महिलाएं इस्लामाबाद आ पहुंची हैं तो शहबाज की पुलिस इन महिलाओं को डराने में लगी है।
बलोच महिलाओं से डरा आसिम मुनीर
पाकिस्तान की आर्मी के जुल्म और सरकारों की अनदेखी के खिलाफ पूरा बलूचिस्तान एकजुट हो गया है। पहले भी पाकिस्तान की पॉलिसी को लेकर यहां विद्रोह हो चुका है।
- पाकिस्तान के खिलाफ पहला विद्रोह 1948 से 1950 के बीच हुआ
- दूसरा विद्रोह 1958 से 1960 तक चला
- 1962-63 तक तीसरा और 1973 से 1977 तक चौथा विद्रोह चला
- लेकिन 2005 से चल रहा पांचवां विद्रोह पहले के सभी विद्रोहों से लंबा भी है खतरनाक भी।
1971 में टूटा पाकिस्तान, अब बनेगा बलूचिस्तान
इस बार बलूचिस्तान के लोग आजादी से कम पर कुछ भी मानने को तैयार नहीं हैं। इस्लामाबाद में बलोच महिलाओं का प्रदर्शन मुनीर और शहबाज के लिए फाइनल अल्टीमेटम है कि अगर अब से भी बलूचिस्तान को लेकर पाकिस्तान ने अपनी पॉलिसी नहीं बदली। बलोचों को उनके अधिकार नहीं दिए तो पाकिस्तान का खंड-खंड होना तय है।
जो आसिम मुनीर दुनिया के ताकतवर फौजों में से एक का फील्ड मॉर्शल होने का दम भरता है, जो शहबाज शरीफ खुद को इस्लामिक मुल्कों का रहनुमा दिखाने की कोशिश करता है। ये दोनों इस्लामाबाद की सड़कों पर बैठीं कुछ बलोच महिलाओं को प्रदर्शन से खौफजदा हैं क्योंकि उन्हें पता है कि इस्लामाबाद की सड़कों से निकली चिंगारी जल्द ही बलूचिस्तान की आजादी में बदल सकती है।
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