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Bangladesh Election: 300 संसदीय सीटों के लिए चुनाव कल, 12.7 करोड़ मतदाता डालेंगे वोट; सुरक्षा व्यवस्था की कड़ी परीक्षा

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Feb 11, 2026 03:07 pm IST, Updated : Feb 11, 2026 03:07 pm IST

बांग्लादेश चुनाव ऐसे वक्त में हो रहा है, जब पूर्व पीएम शेख हसीना भारत में निर्वासित हैं और उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई है। उनके शासन में चुनावों को धांधली का आरोप लगा था। यह चुनाव लोकतंत्र रीसेट करने का मौका है, लेकिन अल्पसंख्यक सुरक्षा और संस्थागत सुधारों की सच्चाई पर निर्भर करेगा।

बांग्लादेश में चुनाव की तैयारी पूरी(फाइल फोटो)- India TV Hindi
Image Source : AP बांग्लादेश में चुनाव की तैयारी पूरी(फाइल फोटो)

ढाका: बांग्लादेश में गुरुवार को सुबह होने वाले राष्ट्रीय चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने तैयारियां पूरी होने का दावा किया है। साल 2024 में हुए बड़े जन-आंदोलन के बाद यह पहला चुनाव है। इस आंदोलन ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की 15 साल पुरानी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंका था। लगभग 17 करोड़ की आबादी वाले देश में 12.7 करोड़ से अधिक मतदाता 12 फरवरी को वोट डालेंगे। 

कुल 1,981 उम्मीदवार

कुल 1,981 उम्मीदवार 300 संसदीय सीटों के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। बांग्लादेश की संसद में 350 सदस्य होते हैं। 300 सीधे चुने जाते हैं, जबकि 50 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। यह फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट सिस्टम से होता है, और संसद का कार्यकाल 5 साल का है।  यह चुनाव बांग्लादेश की लोकतंत्र की परीक्षा है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने निष्पक्ष, शांतिपूर्ण मतदान का वादा किया है। उनके लिए कानून और सुरक्षा व्यवस्था की भी कड़ी परीक्षा है।

विदेश में रहने वाले बांग्लादेशी भी दे सकेंगे वोट

 पहली बार विदेश में रहने वाले बांग्लादेशी पोस्टल वोटिंग से भाग ले सकेंगे। करीब 500 विदेशी पर्यवेक्षक (यूरोपीय संघ, कॉमनवेल्थ आदि) मौजूद रहेंगे।  चुनाव के साथ जनमत संग्रह (रेफरेंडम) भी होगा, जिसमें जुलाई नेशनल चार्टर के सुधारों पर वोट मांगा जाएगा-जैसे प्रधानमंत्री का कार्यकाल सीमित करना, कार्यकारी शक्तियों पर मजबूत जांच, द्विसदनीय संसद (ऊपरी सदन जहां संविधान संशोधन के लिए बहुमत जरूरी), न्यायपालिका स्वतंत्रता आदि।  यह चुनाव 1971 में पाकिस्तान से आजादी के बाद से सैन्य शासन और कमजोर लोकतंत्र की पृष्ठभूमि में स्थिरता तय करेगा। 

नई सरकार के सामने होगी चुनौती

रॉबर्ट एंड एथेल कैनेडी ह्यूमन राइट्स सेंटर की कैथरीन कूपर ने कहा, "नए सरकार को नागरिक स्थान, प्रेस, विपक्ष और सभी नागरिकों की बिना दमन के सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। लगभग 50 लाख नए मतदाता बने हैं। जो कि 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन से प्रेरित हैं। यह परीक्षा है कि क्या युवा आंदोलन स्थायी लोकतांत्रिक बदलाव ला सकता है।  दशकों से दो राजवंशीय पार्टियां पूर्व पीएम शेख हसीना की अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) प्रतिस्पर्धा करती रही हैं। अब बीएनपी (तारिक रहमान के नेतृत्व में) फ्रंटरनर है। 

17 साल बाद ढाका लौटे तारिक

तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर में लौटे और लोकतंत्र, कानून-व्यवस्था और अर्थव्यवस्था सुधारने का वादा कर रहे हैं।  मुख्य चुनौती 11-पार्टी गठबंधन से है, जिसका नेतृत्व जमात-ए-इस्लामी (इस्लामिस्ट) कर रहा है। जमात हसीना के दौर में प्रतिबंधित था, लेकिन अब प्रभाव बढ़ा रहा है। इसमें 2024 उपद्रव के नेताओं द्वारा बनी नेशनल सिटिजन पार्टी भी शामिल है। बांग्लादेश 90% से अधिक मुस्लिम है, जबकि 8% हिंदू। कट्टरपंथी समूहों के बढ़ते प्रभाव से महिलाओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। हिंदू समुदायों ने धमकी, हिंसा और डर की घटनाओं की शिकायत की है। चिंता है कि इस्लामिस्ट गठबंधन इन तनावों का फायदा उठाकर राजनीतिक प्रभाव बढ़ा सकता है।  

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