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पहलगाम:अमेरिका द्वारा TRF को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित करने पर आया जयशंकर का पहला रिएक्शन, जानें क्या कहा?

 Published : Jul 18, 2025 10:49 am IST,  Updated : Jul 18, 2025 10:53 am IST

यह घटनाक्रम भारत और अमेरिका के बीच आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। टीआरएफ जैसे संगठनों के खिलाफ वैश्विक प्रतिबंधों से यह उम्मीद की जा सकती है कि आतंकवादियों की गतिविधियों पर अंकुश लगेगा और भविष्य में इस तरह के हमलों को रोका जा सकेगा।

एस जयशंकर, विदेश मंत्री। - India TV Hindi
एस जयशंकर, विदेश मंत्री। Image Source : PTI

Jaishankar on TRF: अमेरिका द्वारा पहलगाम के हमलावरों (टीआरएफ) को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर का पहला रिएक्शन सामने आया है। जयशंकर ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकी संगठन ‘द रजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) को अमेरिका द्वारा वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने का स्वागत किया है। 

लश्कर से जुड़ा है टीआरएफ

यह संगठन पाकिस्तान में स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़ा हुआ है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने टीआरएफ को विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (SDGT) की सूची में शामिल किया है। इस निर्णय को भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

जयशंकर ने किया पोस्ट

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के फैसले का स्वागत और समर्थन करते हुए इसे भारत और अमेरिका के बीच मजबूत आतंकवाद-रोधी सहयोग का उदाहरण बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अमेरिकी विदेश मंत्रालय की सराहना करते हुए कहा कि यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता को दर्शाता है। जयशंकर ने यह भी याद दिलाया कि टीआरएफ ने 22 अप्रैल 2024 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी।

अमेरिका ने क्या कहा?

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार पहलगाम में हुआ यह हमला 2008 के मुंबई हमलों के बाद भारत में नागरिकों पर किया गया सबसे घातक आतंकवादी हमला था। इसके अतिरिक्त टीआरएफ ने भारतीय सुरक्षा बलों और नागरिकों पर अतीत में भी कई हमलों की जिम्मेदारी ली है। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि इस संगठन को प्रतिबंधित करने का निर्णय न केवल अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है, बल्कि यह अमेरिका की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

पाकिस्तान पर बढ़ेगा दबाव

अमेरिकी सरकार ने इस कार्रवाई को अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा की दिशा में उठाया गया कदम बताया है। इससे यह संदेश भी जाता है कि आतंकवाद के किसी भी स्वरूप को विश्व समुदाय बर्दाश्त नहीं करेगा। चाहे वह किसी भी देश में हो या किसी भी बहाने से हो। अमेरिका की इस पहल से भारत को अपनी सुरक्षा नीति को और मजबूती देने में सहयोग मिलेगा। साथ ही पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भी अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ेगा। 

 

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