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भिखारी पाकिस्तान ने फलस्तीनियों को दिया मदद का भरोसा, जानें इजरायल को लेकर क्या कहा?

 Published : Jul 29, 2025 11:10 am IST,  Updated : Jul 29, 2025 11:10 am IST

कर्ज के बोझ तले कराह रहे पाकिस्तान ने फलस्तीनियों को लेकर बड़ी बात कही है। संयुक्त राष्ट्र के एक वैश्विक सम्मेलन में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने कहा कि गाजा में हालात बदतर हो गए हैं।

 पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार- India TV Hindi
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार Image Source : AP

Pakistan Help Palestinians: पाकिस्तान खुद फटे हाल है, लोग महंगाई से त्रस्त हैं, आटे के लिए लगी लंबी-लंबी लाइनों को भला कौन भूल सकता है। हालात ये हैं कि पाकिस्तान ऐसा मुल्क है जहां अब तक पोलियो महामारी बनी हुई है। अब ऐसे में अपनी परेशानियों से इतर पाकिस्तान का प्रेम फलस्तीनियों के लिए जाग उठा है। संयुक्त राष्ट्र में एक उच्च-स्तरीय वैश्विक सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने फलस्तीन को संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता देने की वकालत कर डाली है। डार ने इजरायल के 'युद्ध अपराधों' की कड़ी निंदा करते हुए वैश्विक समुदाय से तत्काल कार्रवाई करने का आह्वान भी किया है। 

पाकिस्तान ने दिया फलस्तीन को मदद का भरोसा

यहां तक तो ठीक माना जा सकता है लेकिन इसके बाद जो हुआ वह जानकर आप हैरान रह जाएंगे। कर्ज में डूबे पाकिस्तान ने फलस्तीन के विकास का भी भरोसा दिया है। डार ने कहा कि पाकिस्तान केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं करना चाहता, बल्कि फलस्तीन को वास्तविक योगदान देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान सार्वजनिक प्रशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सेवा वितरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में फलस्तीनी नेतृत्व के साथ समन्वय कर तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण का समर्थन देने को तत्पर है।” 

डार ने बयां किया गाजा का हाल

डार ने संयुक्त राष्ट्र में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “गाजा में सहायता रोकी जा रही है, शरणार्थी शिविरों, अस्पतालों और सहायता काफिलों पर जानबूझकर हमले किए जा रहे हैं, ये सब कानूनी और मानवीयता की हर सीमा को पार कर चुके हैं। यह अब बंद होना चाहिए।” उन्होंने कहा, “गाजा आज अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों का कब्रिस्तान बन चुका है। अब तक 58,000 से अधिक फलस्तीनियों की मौत हो चुकी है जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं। यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून, संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेशों का घोर उल्लंघन है।”

डार ने की इंसाफ की बात

अपने भाषण के समापन में डार ने कहा, “इंसाफ में देरी नाइंसाफी की तरह होती है। लेकिन, जब पीढ़ियों को न्याय से वंचित रखा जाए, तो इसके परिणाम और भी गंभीर होते हैं।” उन्होंने जोर देते हुए कहा, “अब समय आ गया है कि हम फलस्तीन के लोगों को उम्मीद दें, स्वतंत्रता, आत्मनिर्णय और देश की मान्यता दें। संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता ही इस क्षेत्र में स्थायी शांति की सबसे बड़ी गारंटी हो सकती है।”

कैसे मिलेगी फलस्तीन पूर्ण सदस्यता?

इस बीच यहां यह भी बता दें कि, फलस्तीन को 2012 से संयुक्त राष्ट्र में"गैर-सदस्य पर्यवेक्षक राज्य" का दर्जा प्राप्त है। पूर्ण सदस्यता के लिए उसे सुरक्षा परिषद की सिफारिश और सामान्य सभा में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी।

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