Sri Lanka News: घर छोड़कर भागे श्रीलंका के राष्ट्रपति Gotabaya Rajapaksa, Vladimir Putin को फोन करना भी न आया काम

Sri Lanka News: राजपक्षे ने बुधवार को कहा था कि उन्होंने अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत की है।

Vineet Kumar Written By: Vineet Kumar @JournoVineet
Published on: July 09, 2022 16:59 IST
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Image Source : AP Gotabaya Rajapaksa and Vladimir Putin.

Highlights

  • हाल ही में श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की थी।
  • पुतिन से बात करना भी राजपक्षे के काम नहीं आया और सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने उनका आवास कब्जा लिया।
  • प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने आपात बैठक बुलाई थी ताकि हालात पर कुछ नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

Sri Lanka News: श्रीलंका के राष्ट्रपति Gotabaya Rajapaksa शनिवार को अपना आधिकारिक आवास छोड़कर भाग निकले। ऐसे में कहा जा सकता है कि भारत के इस पड़ोसी मुल्क में व्यापक स्तर पर गृह युद्ध छिड़ चुका है। प्रधानमंत्री Ranil Wickremesinghe ने आपात बैठक बुलाई है ताकि हालात पर कुछ नियंत्रण स्थापित किया जा सके। बता दें कि श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ महीनों से चौपट पड़ी है और रोजमर्रा की चीजों के लिए भी वह दुनिया के कई दूसरे देशों पर निर्भर रहा है। हाल ही में राजपक्षे ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की थी, लेकिन इसका कोई नतीजा निकलने से पहले ही उन्हें घर छोड़कर भागना पड़ा।

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राजपक्षे ने तेल के लिए पुतिन को किया था फोन

दरअसल, राजपक्षे ने बुधवार को कहा था कि उन्होंने अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ मॉस्को से रियायती दर पर तेल खरीदने के वास्ते ‘सार्थक’ बातचीत की थी। उन्होंने बताया था कि बातचीत के दौरान उन्होंने पुतिन से देश में रूसी ध्वज वाहक ‘एयरोफ़्लोट’ की सेवाओं को फिर से शुरू करने का भी आग्रह किया था। राजपक्षे ने एक ट्वीट में कहा था, ‘रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ टेलीफोन पर बहुत ही सार्थक बातचीत हुई। अतीत की चुनौतियों से उबरने के लिए उनकी सरकार द्वारा दिए गए सभी समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद देते हुए, मैंने मौजूदा आर्थिक चुनौतियों से निपटने के वास्ते श्रीलंका को ईंधन आपूर्ति करने के लिए ऋण सहायता संबंधी पेशकश किए जाने का अनुरोध किया।’

पुतिन से बात करना भी न आया राजपक्षे के काम
हालांकि पुतिन से बात करना भी राजपक्षे के काम नहीं आया और शनिवार को सैकड़ों प्रदर्शनकारी उनके इस्तीफे की मांग करते हुए मध्य कोलंबो के अति सुरक्षा वाले फोर्ट इलाके में बैरिकेड्स को हटाकर राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास में घुस गए। प्रदर्शनकारी देश में गंभीर आर्थिक संकट को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। राजपक्षे पर मार्च से ही इस्तीफा देने का दबाव बढ़ रहा है और वह इससे आनाकानी कर रहे हैं। वह अप्रैल में प्रदर्शनकारियों द्वारा उनके दफ्तर के एंट्री गेट पर कब्जा करने के बाद से ही राष्ट्रपति आवास को अपने घर और दफ्तर के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे।

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शुक्रवार को ही घर से निकल गए थे राजपक्षे
राष्ट्रपति आवास में काम करने वाले लोगों ने बताया कि शनिवार के प्रदर्शन को देखते हुए राष्ट्रपति राजपक्षे ने शुक्रवार को ही आवास खाली कर दिया था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछारें कीं तथा गोलियां चलायी, लेकिन फिर भी प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स को हटाकर राष्ट्रपति आवास में घुस गए। इस दौरान प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति आवास के एक बिस्तर पर लेटे हुए और स्वीमिंग पूल में नहाते हुए भी नजर आए हैं। आवास के अंदर से जो तस्‍वीरें और वीडियो सामने आए हैं, उनमें प्रदर्शनकारी जमकर हुड़दंग करते दिख रहे हैं।

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रानिल विक्रमसिंघे ने बुलाई है आपात बैठक
प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने जनता के प्रदर्शन से देश में पैदा हुए संकट पर चर्चा करने के लिए शनिवार को राजनीतिक दल के नेताओं की तत्काल बैठक बुलायी। विक्रमसिंघे के दफ्तर से जारी एक बयान में कहा गया है कि उन्होंने पार्टी की तत्काल बैठक बुलायी है और स्पीकर से तत्काल संसद का सत्र बुलाने का अनुरोध किया है। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति आवास की दीवारों पर चढ़ गए और वे अंदर ही हैं। हालांकि, उन्होंने किसी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया और न ही किसी तरह की हिंसा की है।

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गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है श्रीलंका
1948 में ब्रिटेन से आजादी के मिलने बाद से 2.2 करोड़ की आबादी वाला देश श्रीलंका सबसे खराब आर्थिक संकट से गुजर रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी से निपटने के लिए उसे कम से कम 400 करोड़ डॉलर की जरूरत है। मई में श्रीलंका ने रूस से 90,000 टन तेल खरीदा था, लेकिन वह उसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए नाकाफी रहा है। संकट के इस समय में श्रीलंका की भारत ने खूब मदद की है और तेल से लेकर चावल तक उपलब्ध कराया है, लेकिन मौजूदा संकट का अंत फिलहाल होता हुआ नजर नहीं आ रहा है।

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