लंदन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि अगर ब्रिटेन ईरान पर अमेरिकी हमलों में शामिल नहीं होता तो दोनों देशों के बीच पिछले साल हुए व्यापार समझौते पर फिर से विचार किया जा सकता है। इस धमकी के एक दिन बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने बुधवार को साफ जवाब दिया कि उनका देश किसी भी हाल में ईरान के युद्ध में शामिल नहीं होगा।
ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने मंगलवार को स्काई न्यूज चैनल के साथ इंटरव्यू में कहा था कि ब्रिटेन के साथ खास रिश्तों में खटास आना दुखद है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच एक अच्छा व्यापार समझौता हुआ था, लेकिन अब इसे बदला भी जा सकता है। ट्रंप का यह बयान ब्रिटेन की ईरान नीति के खिलाफ था।
स्टार्मर ने साफ किया रुख
बुधवार को ब्रिटिश संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स में प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति साफ कर दी। लिबरल डेमोक्रेट पार्टी के नेता एड डेवी ने ट्रंप की धमकी का जिक्र करते हुए महाराजा चार्ल्स तृतीय की अमेरिका यात्रा पर सवाल उठाया। जवाब में स्टार्मर ने कहा, “ईरान युद्ध पर मेरा रुख शुरू से ही एकदम स्पष्ट रहा है। हम इस युद्ध में नहीं उलझेंगे। यह हमारा युद्ध नहीं है।”
'मैं फैसला नहीं बदलूंगा'
स्टार्मर ने कहा कि उन पर इस मुद्दे पर अलग रुख अपनाने के लिए बहुत दबाव डाला गया। ट्रंप का स्काई न्यूज इंटरव्यू भी इस दबाव का हिस्सा था। लेकिन प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, “मैं अपना फैसला नहीं बदलूंगा। मैं झुकने वाला नहीं हूं। इस युद्ध में शामिल होना ब्रिटेन के राष्ट्रीय हित में नहीं है और हम ऐसा नहीं करेंगे।”
महाराजा चार्ल्स तृतीय की अमेरिका यात्रा पर नहीं पड़ेगा असर
ट्रंप का मानना है कि ब्रिटेन को अमेरिका का साथ देना चाहिए, खासकर ईरान जैसे मुद्दों पर। लेकिन, स्टार्मर सरकार का कहना है कि ब्रिटेन अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर चलेगा और बिना सोचे समझे किसी युद्ध में कूदने से बचेगा। हालांकि, प्रधानमंत्री स्टार्मर ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप की धमकी का महाराजा चार्ल्स तृतीय की अमेरिका यात्रा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह चार दिवसीय राजकीय यात्रा 27 अप्रैल से शुरू होने वाली है। स्टार्मर ने कहा, “इस यात्रा का मकसद अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत करना और अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ मनाना है।”
क्या चाहते हैं ब्रिटेन के लोग?
ब्रिटेन के कई नेता और जनता भी ईरान युद्ध में शामिल ना होने का समर्थन कर रही है। वो मानते हैं कि ब्रिटेन को अपने संसाधनों और सैनिकों को बिना जरूरत के किसी विदेशी संघर्ष में नहीं झोंकना चाहिए। अब देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप इस मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाते हैं। क्या वो वाकई व्यापार समझौते पर पुनर्विचार करेंगे या यह सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति है। स्टार्मर भी अपने फैसले पर कायम हैं और झुकने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।
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