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जॉर्जिया के चुनावों में सत्तारूढ़ पार्टी की जीत के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा और विरोध प्रदर्शन, राष्ट्रपति भवन में घुसी भीड़

 Published : Oct 05, 2025 11:17 am IST,  Updated : Oct 05, 2025 11:17 am IST

यूरोपीय देश जॉर्जिया में सत्तारूढ़ पार्टी की स्थानीय चुनावों में जीत के बाद बवाल और हिंसा से अराजतका फैल गई है। देश में जगह-जगह आगजनी और हिंसक घटनाएं रिपोर्ट की जा रही हैं।

जॉर्जिया में विरोध प्रदर्शन करते लोग। - India TV Hindi
जॉर्जिया में विरोध प्रदर्शन करते लोग। Image Source : AP

मॉस्कोः जॉर्जिया के स्थानीय चुनावों में शनिवार को सत्तारूढ़ पार्टी की जीत के बाद देश भर में हिंसा और विरोध प्रदर्शनों से हालात बेकाबू हो गए हैं। आक्रोशित भीड़ राष्ट्रपति भवन में प्रवेश करने लगी। मगर मौके पर तैनात पुलिस ने प्रर्शनकारियों पर आंसू गैस और पानी की तोपों का इस्तेमाल किया। जॉर्जिया की सड़कों पर हजारों लोग लोकतंत्र बचाने के लिए विपक्ष के आह्वान पर एकत्रित हुए हैं।

जॉर्जिया में क्यों मचा बवाल

मॉस्को टाइम्स के अनुसार सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन उस समय शुरू हुए जब कुछ विपक्षी नेताओं ने जॉर्जियन ड्रीम पार्टी की नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ “शांतिपूर्ण क्रांति” का आह्वान किया। सत्तारूढ़ पार्टी पर रूसी समर्थक और अधिनायकवादी होने का आरोप है।
देश का पश्चिम समर्थक विपक्ष पिछले साल तभी से प्रदर्शन कर रहा है, जब जॉर्जियन ड्रीम ने चुनाव जीता था। आलोचक कहते हैं कि जॉर्जियन ड्रीम ने धोखाधड़ी से चुनाव जीता था और उसके बाद जॉर्जियन ड्रीम ने जॉर्जिया की यूरोपीय संघ में सदस्यता वार्ता को रोक दिया, जो एक लंबे समय से चला आ रहा राष्ट्रीय लक्ष्य था।

 

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुईं झड़पें

जॉर्जिया में पुलिस और सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच राजधानी त्बिलिसी में राष्ट्रपति महल पर धावा बोलने की कोशिश के दौरान झड़पें हुईं। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की तोपों और मिर्ची स्प्रे का इस्तेमाल किया। काकेशस देश तब से संकट में है जबसे सत्तारूढ़ जॉर्जियन ड्रीम पार्टी ने पिछले साल हुए संसदीय चुनाव में जीत का दावा किया, जिसे प्रो-यूरोपीय संघ विपक्ष ने वोट चोरी करार दिया था। तब से सरकार ने यूरोपीय संघ में शामिल होने की वार्ता रोक दी है। 

 

अचानक क्यों सड़कों पर उतरे लोग

ताजा प्रदर्शन स्थानीय चुनावों में सत्तारूढ़ पार्टी की जीत के बाद शुरू हुआ है। विपक्ष ने बड़े पैमाने पर इसका बहिष्कार किया है। आरोप है कि सरकार की दमनकारी कार्रवाई के चलते ऐसा हुआ है। एक आयोजक ने पहले जॉर्जियन ड्रीम पार्टी के नेताओं को गिरफ्तार करने की मांग की थी। इसके बाद देश के लोगों से सरकार की तानाशाही के खिलाफ सड़क पर उतरने का आह्वान किया। 

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