वाशिंगटन: सत्तर के दशक के आखिर में सीआईए को पता था कि चीन ने पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को हथियार डिजाइन सूचना मुहैया कर उसे सहायता दी। अमेरिका द्वारा अभी-अभी सार्वजनिक किए गए गोपनीय दस्तावेजों में इस बात का खुलासा किया गया है। इस बात के कयास लगाए जाते रहे हैं कि पाकिस्तान के परमाणु क्षमता हासिल करने में चीन ने उसे मदद की है।
पाकिस्तान को परमाणु क्षमता हासिल करने में चीनी मदद मिलने पर था संदेह
नेशनल सिक्युरिटी आर्काइव द्वारा स्टेट डिपार्टमेंट ब्यूरो ऑफ इंटेलीजेंस एंड रिसर्च (आईएनआर) और परमाणु अप्रसार अंतरराष्ट्रीय इतिहास परियोजना की रिपोर्टों के मुताबिक अक्तूबर 1964 में चीन के प्रथम परमाणु परीक्षण के कुछ साल बाद आईएनआर ने यह हैरानगी जताई गई थी कि क्या चीन परमाणु क्षमता हासिल करने में पाकिस्तान की मदद करेगा।
52 साल पहले चीन के पास थे सीमित संसाधन
आईएनआर विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के पास सीमित संसाधन थे और परमाणु सहयोग के सवाल पर वह सतर्क होने के अलावा निर्णय लेने की स्थिति में नजर नहीं आ रहा था लेकिन उन्होंने सतर्कता भरी चिंता के लिए कारण देखें। आईएनआर विश्लेषक थॉमस थार्नटन ने निष्कर्ष दिया कि पाकिस्तान द्वारा एक अहम चीनी परमाणु सहयोग मांगने की संभावना नहीं थी क्योंकि अमेरिका के साथ उसके संबंधों में तनाव लाता। साथ ही, कुछ ऐसी चीजें भी थी कि भारत परमाणु हथियार तैयार करने का फैसला कर लेगा।
परमाणु क्षेत्र में पाक-चीन सहयोग की कोई निश्चित योजना नहीं थी
थार्नटन ने लिखा है कि अब तक मिले साक्ष्य से हम इस बात को लेकर सहमत नहीं हैं कि किसी भी तरह के परमाणु क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान सहयोग के लिए कोई निश्चित योजना थी लेकिन अगर ऐसा था तो यह शांतिपूर्ण क्षेत्र में होने की संभावना थी। क्या पाकिस्तान सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार अब्दुस सलाम ने परमाणु बम बनाने के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के 1972 के फैसले में कोई सकारात्मक भूमिका निभाई थी या नहीं, यह विवाद का विषय रहा है। नेशनल सेक्युरिटी अर्काइव के मुताबिक जब भुट्टो ने आगे बढ़ने का फैसला कर लिया तब सलाम ने शीर्ष वैज्ञानिकों को इसे अंजाम देने के लिए भर्ती किया।