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'चीन के लिए भारत जैसे दोस्त को..' अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने ट्रंप को दी नसीहत, जानें क्या कहा

 Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : Aug 24, 2025 09:46 am IST,  Updated : Aug 24, 2025 10:20 am IST

"चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी पर कोई विचार नहीं किया जाना चाहिए" और ट्रम्प प्रशासन को भारत को अलग-थलग नहीं करना चाहिए। अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने दी चेतावनी, जानें और क्या कहा?

अमेरिका की पूर्व राजदूत निकी हेली- India TV Hindi
अमेरिका की पूर्व राजदूत निकी हेली Image Source : FILE PHOTO (AP)

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने शुक्रवार को भारत-अमेरिका संबंधों के महत्व पर जोर देते हुए ट्रंप प्रशानस को चेतावनी दी कि चीन की बढ़ती आक्रामकता के समय भारत को अलग-थलग करना एक 'रणनीतिक आपदा' होगी। उनकी यह टिप्पणी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगाने के फैसले के बाद आई है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में तनाव पैदा हो गया है। हडसन इंस्टीट्यूट के बिल ड्रेक्सेल के साथ सह-लिखित एक लेख में, हेली ने तर्क दिया कि "चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी पर कोई विचार नहीं होना चाहिए।"


भारत और चीन नहीं हैं अच्छे पड़ोसी

निकी हेली ने लिखा, "चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी पर कोई विचार नहीं किया जाना चाहिए। भारत और चीन ऐसे पड़ोसी हैं जिनके आर्थिक हित परस्पर विरोधी रहे हैं और दोनों देशों के बीच लंबे समय से क्षेत्रीय विवाद चल रहे हैं, जिनमें हाल ही में 2020 में विवादित सीमाओं पर हुई एक घातक झड़प भी शामिल है। कम्युनिस्ट चीन के विपरीत, भारत का दुनिया के किसी देश के लिए खतरा नहीं है। अब चीन के सामने भारत को खड़ा करने में मदद करना अमेरिका के हितों की पूर्ति करेगा।"

भारत अमेरिका संबंधों का दिया हवाला

हेली ने भारत और अमेरिका के संबंधों की गहराई को रेखांकित करने के लिए इतिहास का हवाला दिया और कहा, साल 1982 में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सम्मान में आयोजित राजकीय रात्रिभोज में रीगन ने "दो गौरवान्वित, स्वतंत्र लोगों" की मित्रता का जश्न मनाया था।  यह संबंध अब एक "चिंताजनक मोड़" पर पहुंच गया है। भारत के साथ एक बहुमूल्य स्वतंत्र और लोकतांत्रिक साझेदार की तरह व्यवहार किया जाना चाहिए, न कि चीन जैसे विरोधी की तरह, जो अब तक रूस से तेल खरीद के कारण प्रतिबंधों से बचता रहा है।"

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