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हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के चीनी सरकार से संबंध! ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों के दाखिले पर इसलिए लगाया बैन? समझें पूरा मामला

 Published : May 23, 2025 06:31 pm IST,  Updated : May 23, 2025 11:39 pm IST

ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ समन्वय करने का आरोप लगाया है। प्रशासन ने कहा कि हार्वर्ड को 2025-26 शैक्षणिक साल के लिए F-1 या J-1 वीजा पर किसी भी विदेशी नागरिक को प्रवेश देने से रोकता है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी- India TV Hindi
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी Image Source : INDIA TV GFX

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई कड़े फैसले ले रहे है। उनके इन फैसलों के खिलाफ अब अमेरिका के अंदर भी आवाज उठने लगी है। हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को नए अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को दाखिला देने से रोक दिया है। इसके लिए ट्रंप प्रशासन ने यूनिवर्सिटी पर असुरक्षित परिसर के माहौल का आरोप लगाया है। साथ ही चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ संबंधों का भी हवाला दिया है। ट्रंप प्रशासस ने कहा कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने हाल ही में 2024 तक एक चीनी अर्धसैनिक समूह के सदस्यों की मेजबानी और प्रशिक्षण किया था।

72 घंटे का दिया गया था समय

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS ) द्वारा जारी एक पत्र में यूनिवर्सिटी को 72 घंटे के भीतर संघीय अनुरोधों का पालन करने या स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (SEVP) से प्रतिबंधित रहने का आदेश दिया गया था। ट्रंप प्रशासन की ओर से कहा गया था कि यह निर्णय तुरंत प्रभावी होता है।

लगभग 7000 विदेशी छात्र प्रभावित

ट्रंप प्रशासन ने कहा हार्वर्ड को 2025-26 शैक्षणिक साल के लिए F-1 या J-1 वीजा पर किसी भी विदेशी नागरिक को प्रवेश देने से रोकता है। यह कदम वर्तमान में यूनिवर्सिटी में नामांकित लगभग 7,000 अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को भी प्रभावित करता है।  डीएचएस ने इन छात्रों को अमेरिका में अपनी कानूनी आव्रजन (Legal immigration) स्थिति बनाए रखने के लिए अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है

22 मई हार्वर्ड को लिखा गया पत्र

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी की सचिव क्रिस्टी नोएम ने 22 मई को हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा, 'विदेशी छात्रों को दाखिला देना एक विशेषाधिकार है। आपने यह विशेषाधिकार खो दिया है।' डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने कई समय सीमाओं के बावजूद छात्र आचरण और परिसर गतिविधि से संबंधित रिकॉर्ड प्रदान करने से हार्वर्ड के इनकार का हवाला दिया।

 DHS ने यूनिवर्सिटी को दिया एक अतिरिक्त अवसर

DHS ने पहली बार 16 अप्रैल को जानकारी मांगी थी, जिसमें अनुशासनात्मक रिकॉर्ड और गैर-आप्रवासी छात्रों से जुड़े विरोध-संबंधी फुटेज शामिल थे। जब हार्वर्ड के जवाब अधूरे पाए गए तो DHS ने यूनिवर्सिटी को एक अतिरिक्त अवसर दिया। विभाग ने कहा, 'हार्वर्ड ने फिर से अपर्याप्त जवाब दिया है।'

मुकदमा चलाए जाने की चेतावनी

पत्र में डीएचएस ने कहा कि यूनिवर्सिटी के पास पूर्ण और संपूर्ण दस्तावेज जमा करने के लिए 72 घंटे हैं। उसे निरन्तर निरस्तीकरण का सामना करना पड़ेगा। विभाग ने चेतावनी दी कि गलत या भ्रामक जानकारी देने पर आप पर 18 यूएससी 1001 के तहत आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है।

यहूदी छात्रों के लिए शत्रुतापूर्ण और हमास समर्थकों को बढ़ावा देना का आरोप

ट्रंप प्रशासन के डीएचएस विभाग के तर्क में यह आरोप भी शामिल था कि हार्वर्ड यहूदी छात्रों के लिए शत्रुतापूर्ण माहौल बनाए रखता है। हमास समर्थक सहानुभूति को बढ़ावा देता है। नस्लवादी विविधता, समानता और समावेश की नीतियों को लागू करता है। 

चीन के हजारों छात्रों पर असर पड़ने की उम्मीद

वहीं, इस घटनाक्रम से हजारों विदेशी छात्रों, विशेष रूप से चीन के छात्रों पर असर पड़ने की उम्मीद है, जो हार्वर्ड के अंतर्राष्ट्रीय समूह का एक बड़ा हिस्सा हैं। यह ट्रंप प्रशासन के राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंडे के तहत अमेरिकी उच्च शिक्षा संस्थानों की सख्त संघीय निगरानी का भी संकेत देता है।

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