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शिशुओं को जन्म के समय लगने वाले 'हेपेटाइटिस-बी' के टीके को लेकर बड़ा अपडेट, अमेरिकी समिति ने दी ये रिपोर्ट

 Published : Dec 05, 2025 11:11 pm IST,  Updated : Dec 05, 2025 11:11 pm IST

शिशुओं को जन्म के समय लगने वाले हेपेटाइटिस-बी टीके को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिकी समिति का कहना है कि अब इसे सभी शिशुओं को लगाना जरूरी नहीं है।

हेपेटाइटिस-बी टीके र जानकारी देते अमेरिकी सलाहकार (फाइल)- India TV Hindi
हेपेटाइटिस-बी टीके र जानकारी देते अमेरिकी सलाहकार (फाइल) Image Source : AP

न्यूयॉर्क: जन्म के समय सभी नवजात शिशुओं को लगने वाले हेपेटाइटिस बी के टीके को लेकर अमेरिका से बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिका की संघीय टीका सलाहकार समिति ने शुक्रवार को लंबे समय से चली आ रही उस सिफारिश को खत्म करने के लिए वोट दिया, जिसमें सभी अमेरिकी नवजात शिशुओं को जन्म के दिन ही हेपेटाइटिस-बी का टीका लगाने की बात कही जाती थी। चिकित्सा और जन स्वास्थ्य जगत के प्रमुख लोगों ने इस कदम की कड़ी निंदा की। समिति के मौजूदा सभी सदस्यों की नियुक्ति इस साल अमेरिकी स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर ने की है, जो इससे पहले प्रमुख एंटी-वैक्सीन कार्यकर्ता रहे हैं। अमेरिकी सलाहकारों ने बताया है कि अब यह टीका लगाना जरूरी है या नहीं?

हेपेटाइटिस का टीका क्यों लगता है

दशकों से सरकार की सलाह थी कि सभी नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद लीवर इन्फेक्शन (हेपेटाइटिस-बी) से बचाने के लिए टीका लगाया जाए। इस टीके को हजारों बीमारियों को रोकने में बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य सफलता माना जाता रहा है, लेकिन कैनेडी की सलाहकार समितिने अब फैसला किया है कि जन्म के समय टीका केवल उन शिशुओं को लगाया जाए:जिनकी माँ हेपेटाइटिस-बी पॉजिटिव पाई गई हो, या जिनकी माँ का टेस्ट ही ना हुआ हो। बाकी शिशुओं के लिए यह फैसला माता-पिता और उनके डॉक्टर पर छोड़ दिया गया है।

समिति का क्या है सुझाव

समिति ने सुझाव दिया कि अगर परिवार जन्म के समय टीका न लगवाने का फैसला करता है, तो टीके की पूरी श्रृंखला बच्चे के 2 महीने का होने पर शुरू की जाए। अब यह फैसला सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के कार्यवाहक निदेशक जिम ओ’नील को करना है कि वे इस सिफारिश को स्वीकार करते हैं या नहीं। यह फैसला तीन दशक से ज्यादा पहले त्याग दी गई सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति की वापसी है। जब समिति की सदस्य विकी पेब्सवर्थ से पूछा गया कि नई नियुक्त समिति ने इतनी जल्दी इस सिफारिश को फिर से जांचने का फैसला क्यों किया, तो उन्होंने गुरुवार को कहा, “हितधारक समूहों का दबाव था कि नीति पर फिर से विचार किया जाए।”

अधिकांश शिशुओं को संक्रमण का जोखिम कम

समिति के सदस्यों ने कहा कि अधिकांश शिशुओं को संक्रमण का जोखिम बहुत कम है। उन्होंने कहा कि  पहले के वे शोध, जिसमें नवजातों के लिए टीके को सुरक्षित बताया गया था, वह अपर्याप्त थे। उन्हें यह भी चिंता थी कि कई मामलों में डॉक्टर-नर्स माता-पिता से जन्म-डोज के फायदे-नुकसान पर पूरी बातचीत नहीं करते। समिति ने जन स्वास्थ्य और चिकित्सा विशेषज्ञों की राय सुनने की इच्छा जताई, लेकिन विशेषज्ञों के बार-बार अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया कि सिफारिश को यथावत रखा जाए। ह्यूस्टन के टेक्सास चिल्ड्रन हॉस्पिटल सेंटर फॉर वैक्सीन डेवलपमेंट के डॉ. पीटर होटेज़ ने समिति के सामने प्रस्तुति देने से इनकार कर दिया। उन्होंने एपी को ईमेल में कहा, “ACIP ने अपना मिशन विज्ञान और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा से हटा लिया लगता है।”

क्या है हेपेटाइटिस-बी

हेपेटाइटिस-बी एक गंभीर लीवर संक्रमण है। ज्यादातर लोगों में यह 6 महीने से कम रहता है, लेकिन शिशुओं और बच्चों में यह स्थायी हो सकता है और लीवर फेल्योर, लीवर कैंसर या सिरोसिस का कारण बन सकता है। वयस्कों में यह वायरस सेक्स या नशीली दवाओं की सुई साझा करने से फैलता है, लेकिन यह संक्रमित माँ से बच्चे में भी जा सकता है। 1991 में समिति ने जन्म के समय पहला डोज अनिवार्य करने की सिफारिश की थी। विशेषज्ञ कहते हैं कि तुरंत टीकाकरण से संक्रमण को जड़ पकड़ने से रोका जा सकता है। वाकई बच्चों में मामले नाटकीय रूप से कम हुए हैं। फिर भी कैनेडी की समिति के कई सदस्यों ने सभी नवजातों को टीका लगाने में असहजता जताई। उनका तर्क था कि नवजातों पर पुराने सुरक्षा अध्ययन सीमित थे और बड़े, लंबे अध्ययन में जन्म-डोज से कोई समस्या सामने आ सकती है। 

विचारों में मतभेद

समिति दो सदस्यों ने कहा कि जन्म-डोज से किसी तरह की हानि के कोई दस्तावेजी सबूत नहीं हैं और चिंता केवल अनुमान पर आधारित है। बैठक में कभी-कभी तीखी बहस हुई। समिति के सदस्य डॉ. जोसेफ हिबेल्न ने बार-बार प्रस्ताव का विरोध किया और कहा, “यह अमानवीय है।” समिति के अध्यक्ष डॉ. किर्क मिल्होआन ने कहा कि 2 महीने इसलिए चुने गए क्योंकि तब शिशु नवजात अवस्था से आगे निकल चुका होता है। हिबेल्न ने जवाब दिया कि इसके लिए कोई डेटा पेश नहीं किया गया कि 2 महीने कोई उपयुक्त कट-ऑफ है। कई पर्यवेक्षकों ने बैठक की आलोचना की। (एपी)

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