अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का मिशन आर्टेमिस 2 सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। मिशन में शामिल चारों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित धरती पर वापस लौट चुके हैं। शनिवार सुबह नासा के अंतरिक्ष यान ने सैन डिएगो कोस्ट पर लैंडिंग की। स्पेस एजेंसी ने बताया कि इस मिशन में शामिल लोगों ने 690,000 मील से ज्यादा सफर किया। 10 दिन के इस मिशन की सफलता के बाद नासा आर्मेटिस-3 की तैयारी में जुट गया है। मौजूदा मिशन में अंतरिक्ष यात्री सिर्फ चंद्रमा के पास से गुजरे, लेकिन अगले मिशन में यात्री चांद पर उतरेंगे।
अंतरिक्ष यात्रियों के वापस लौटने पर नासा ने अंतरिक्ष यान की लैंडिंग का वीडियो शेयर किया। इसके साथ ही एक्स पर लिखा, "रीड, विक्टर, क्रिस्टीना और जेरेमी, आपका घर में स्वागत है!आर्टेमिस II एस्ट्रोनॉट्स 11 अप्रैल को रात 8:07 बजे (अमेरिकी समय के अनुसार) चांद पर उतर गए हैं, जिससे चांद के चारों ओर उनका ऐतिहासिक 10-दिन का मिशन खत्म हो गया है।"
हाइड्रोजन रिसाव के कारण टला मिशन
पहले यह मिशन फरवरी में निर्धारित था, लेकिन हाइड्रोजन ईंधन रिसाव के कारण इसे टालना पड़ा। रिसाव ठीक करने के बाद हीलियम प्रेशर लाइन में रुकावट आ गई, जिसके चलते रॉकेट को पिछले महीने के अंत में फिर से मरम्मत के लिए ले जाना पड़ा। करीब डेढ़ सप्ताह पहले रॉकेट को दोबारा प्रक्षेपण स्थल पर लाया गया, जबकि अमेरिकी-कनाडाई दल शुक्रवार को यहां पहुंच चुका है। यह मिशन ऐतिहासिक 'अपोलो' कार्यक्रम से अलग है, जिसके तहत 1968 से 1972 के बीच केवल पुरुषों को चंद्रमा पर भेजा गया था। 53 साल बाद अब चंद्रमा पर जा रहे 'आर्टेमिस-2' के दल में एक महिला, अश्वेत अंतरिक्ष यात्री और एक गैर-अमेरिकी सदस्य शामिल हैं।
नासा के पास था 6 दिन का समय
नासा के पास 'आर्टेमिस-2' के प्रक्षेपण के लिए अप्रैल के पहले छह दिनों का समय था। यदि इस दौरान प्रक्षेपण नहीं हो पाता है, तो नासा को अप्रैल के अंत तक इंतजार करना पड़ता। हालांकि, नासा ने इसी समय में आर्टेमिस-2 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह 50 साल से ज्यादा समय बाद पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन रहा। यह मिशन दो साल में चांद पर उतरने की नासा की कोशिश की शुरुआत है। अमेरिका के तीन और कनाडा के एक अंतरिक्ष यात्री को लेकर 32 मंजिला रॉकेट नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से रवाना हुआ था, जहां इस नए युग की शुरुआत देखने के लिए दस हजार के करीब लोग एकत्र हुए थे। आसपास की सड़कें और समुद्र तट भी लोगों से खचाखच भरे हुए थे, जिससे 1960 और 70 के दशक के अपोलो चंद्र अभियानों की याद ताजा हो गई। यह चांद पर स्थायी मौजूदगी स्थापित करने की दिशा में नासा का अब तक का सबसे बड़ा कदम है।
फ्लोरिडा से भरी उड़ान
आर्टेमिस 2 ने फ्लोरिडा के उसी प्रक्षेपण स्थल से उड़ान भरी जहां से बहुत पहले अपोलो के अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजा गया था। उनमें से जो चंद लोग अब भी जीवित हैं, उन्होंने भी स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट से उड़ान भर रही नयी पीढ़ी का उत्साह बढ़ाया। आर्टेमिस 2 के कमांडर रीड वाइजमैन ने ''चलो चांद पर चलते हैं!'' के घोष के साथ अंतरिक्ष की ओर इस अभियान की अगुवाई की और उनके साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन थे।
10 दिन में क्या-क्या किया?
अंतरिक्ष यात्री अपनी 10 दिवसीय यात्रा के पहले 25 घंटे पृथ्वी के करीब ही रहे। पृथ्वी के चारों ओर कक्षा में कैप्सूल की जांच करने के बाद मुख्य इंजन चालू किया, जो उन्हें चंद्रमा तक ले गया। वे न तो चंद्रमा पर रुके और न ही उसकी परिक्रमा की, जैसा कि अपोलो 8 के पहले चंद्रयात्रियों ने 1968 की क्रिसमस की पूर्व संध्या पर किया था। उनका कैप्सूल चंद्रमा के पास से गुजरा और उससे 6,400 किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद यू-टर्न लेकर सीधे प्रशांत महासागर में उतरा। इसी के साथ वे सबसे दूर तक जाने वाले इंसान बन गए।
स्पेस में पहली बार पानी और टॉयलेट की सुविधा
आर्टेमिस 1 के प्रक्षेपण के बाद से तीन साल से अधिक समय बीत चुका है। उस समय आर्टेमिस 1 कैप्सूल में कोई भी मनुष्य सवार नहीं था। उसमें जीवन रक्षक उपकरण और पानी की व्यवस्था करने वाला यंत्र एवं शौचालय जैसी अन्य आवश्यक सुविधाएं मौजूद नहीं थीं। ये प्रणालियां आर्टेमिस 2 के जरिए अंतरिक्ष में पहली बार इस्तेमाल हुईं, जिससे जोखिम ज्यादा था। यही वजह थी कि नासा ने वाइजमैन और उनके दल को चांद की ओर चार दिन की यात्रा और चार दिन की वापसी यात्रा पर भेजने से पहले पूरा एक दिन इंतजार किया।
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