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बस ड्राइवर थे निकोलस मादुरो, सत्य साईं बाबा के भक्त भी रहे, दिलचस्प है वेनेजुएला के राष्ट्रपति बनने तक का सफर

Edited By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1 Published : Jan 03, 2026 11:21 pm IST, Updated : Jan 05, 2026 03:34 pm IST

मादुरो एक बस ड्राइवर के तौर पर काम करते थे। वे भारत के प्रसिद्ध सत्य साईं बाबा के भक्त भी रहे। धीरे-धीरे वे लेबर यूनियन के नेता बने फिर वे सत्ता के शिखर तक पहुंचे। मादुरो अब अमेरिकी फौज के कब्जे में हैं।

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Image Source : AP/X@VISHWANANDA सत्य साईं बाबा के भक्त रहे हैं मादुरो

काराकस (वेनेजुएला): निकोलस मादुरो अब अमेरिका की गिरफ्त में हैं। अमेरिका की सेना एक युद्धपोत में मादुरो को बंधक बनाकर न्यूयॉर्क ले जा रही है। निकोलस मादुरो ने एक बस ड्राइवर से वेनेजुएला के राष्ट्रपति बनने तक का सफर तय किया। हालांकि उन पर देश में लोकतंत्र के पतन और आर्थिक तबाही को लेकर आंखे मूंदे रहने के आरोप लगे। वह भारत के प्रसिद्ध धर्मगुरु सत्य साईं के भी बड़े भक्त रहे हैं।

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अमेरिका ने शुक्रवार देर रात वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर हमला किया। अमेरिका ने कहा है कि मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया है और उन्हें देश से बाहर ले जाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी मादुरो को बंधक बनाने की पुष्टि की। मादुरो ऐसे समय में शासन कर रहे थे, जब पिछले कुछ महीने से अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर हमला करने और उसे अपने नियंत्रण में लेने के इरादों की अटकलों को हवा दी जा रही थी। 

अमेरिका को वेनेजुएला के लिए बताया था सबसे बड़ा खतरा 

दरअसल माना जा रहा है कि अमेरिकी हमले का उद्देश्य उस ‘‘स्वघोषित समाजवादी क्रांति को समाप्त करना था’’, जिसे उनके दिवंगत पॉलिटिकल गुरु और पूर्ववर्ती ह्यूगो शावेज ने 1999 में शुरू किया था। शावेज की तरह, मादुरो ने भी अमेरिका को वेनेजुएला के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था, और लोकतांत्रिक मानदंडों को बहाल करने के किसी भी प्रयास के लिए डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन प्रशासन की कड़ी आलोचना की थी। 

40 साल पहले राजनीतिक करियर शुरू किया 

निकोलस मादुरो का राजनीतिक करियर करीब 40 साल पहले शुरू हुआ था। 1986 में वह एक साल के वैचारिक प्रशिक्षण के लिए क्यूबा गए, जो हाई स्कूल के बाद उनकी एकमात्र औपचारिक शिक्षा थी। वापस लौटने पर, मादुरो ने काराकस में बस ड्राइवर के रूप में काम किया, जहां वह जल्दी ही लेबर यूनियन के नेता बन गए। 1990 के दशक में वेनेजुएला की खुफिया एजेंसियों ने उन्हें क्यूबा सरकार से घनिष्ठ संबंध रखने वाले घोर वामपंथी के रूप में चिन्हित किया। 

ड्राइवर की नौकरी छोड़ आंदोलन में कूदे

निकोलस मादुरो ने अंततः बस ड्राइवर की नौकरी छोड़ दी और उस राजनीतिक आंदोलन में शामिल हो गए जिसे शावेज ने खड़ा किया था। शावेज को वर्षों पहले एक असफल सैन्य तख्तापलट का नेतृत्व करने के लिए 1994 में राष्ट्रपति से क्षमादान मिला था, जिसके बाद उन्होंने राजनीतिक अभियान शुरू किया था। वर्ष 2013 में अपने निधन से पहले राष्ट्र को दिए गए अपने अंतिम संबोधन में शावेज ने मादुरो को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। 2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद से मादुरो लगातार इस पद पर बने हुए थे। इससे पहले मादुरो देश के विदेश मंत्री और उपराष्ट्रपति भी रहे चुके थे। 

सत्य साईं के भक्त हैं मादुरो

राष्ट्रपति बनने से भी पहले से निकोलस मादुरो भारत के प्रसिद्ध धर्मगुरू सत्य साईं बाबा को मानते हैं। निकोलस ने सत्य साईं की तस्वीर अपने राष्ट्रपति भवन में भी टांग रखी थी। राष्ट्रपति बनने से पहले ही मादुरो भारत आए थे और उन्होंने सत्य साईं बाबा से मुलाकात भी की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स ने आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में प्रशांति निलयम आश्रम का दौरा किया था। यहीं पर उन्होंने सत्य साईं बाबा के साथ निजी मुलाकात की थी। बता दें कि अप्रैल 2011 में सत्य साईं बाबा का निधन हो चुका है।

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