US Venezuela Tension: अमेरिका-वेनेजुएला के तनाव के बीच शनिवार को बड़ी खबर आई कि अमेरिकी सैनिकों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सोशल ट्रुथ पर ऐलान किया कि अमेरिका ने वेनेजुएला में बड़ा ऑपरेशन किया है। सैनिक, मादुरो को पकड़कर अमेरिका ले आए हैं। ये घटना हैरान करने वाली है। लेकिन सच तो ये है कि अमेरिका ऐसा पहले भी कर चुका है। 26 साल पहले उसने पनामा के तत्कालीन तानाशाह मैनुअल नोरिएगा को भी कुछ इसी तरह पकड़ा था और अपने देश में लाकर उनपर मुकदमा चलाया था। आइए जानते हैं कि पनामा के तानाशाह को पकड़ने की कहानी।
कभी अमेरिका के भरोसेमंद थे नोरिएगा
Britannica में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, साल था 1989 और जगह साउथ अमेरिका का छोटा सा देश पनामा, लेकिन विश्व की सबसे मजबूत सेना अमेरिका की नजरें यहां टिकी थीं। कारण था- पनामा का तानाशाह मैनुअल नोरिएगा, जो एक जमाने में अमेरिका के भरोसेमंद हुआ करते थे, लेकिन बाद में वही अमेरिका को आंखें दिखाने लगे और उनके सबसे बड़े दुश्मन बन बैठे।
अमेरिका ने नोरिएगा को कैसे बनाया विलेन?
मैनुअल नोरिएगा लंबे वक्त तक अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA को गुप्त सूचनाएं भेजता था लेकिन 1980 के दशक के अंत में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। नोरिएगा पर आरोप लगाए गए कि वो ड्रग कार्टेल्स से जुड़े हुए हैं। वो कोकीन की स्मगलिंग में शामिल है। एंटी-अमेरिका पॉलिटिक्स करते हैं। अमेरिका ने उनको ड्रग ट्रैफिकिंग का दोषी बताया, लेकिन परेशानी ये थी कि वह सत्ता में बैठा एक रूलर था।
ऑपरेशन जस्ट कॉज: पनामा पर सीधा हमला
अमेरिका ने दिसंबर, 1989 में पनामा में Operation Just Cause शुरू किया। करीब 24 हजार अमेरिकी सैनिकों ने पनामा में घुसपैठ की। तब अमेरिका का तर्क था कि पनामा में लोकतंत्र लाना और ड्रग माफिया के खिलाफ एक्शन। लेकिन इसके पीछे असली मकसद था तानाशाह मैनुएल नोरिएगा को जिंदा पकड़ना।
जब दूतावास में छिपा तानाशाह
हमले के बाद जब मैनुएल नोरिएगा को लगा कि वो ज्यादा देर छिपे नहीं रह सकते तो वो वेटिकन दूतावास में चल गए। यह जगह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत सुरक्षित होती है। दूतावास के अंदर नोरिएगा को पकड़ने के लिए अमेरिकी सैनिक सीधे नहीं घुस सकते थे तो उन्होंने इसके लिए अनोखा तरीका अपनाया।
बड़े लाउडस्पीकर्स से डराकर किया गिरफ्तार
अमेरिकी सेना ने दूतावास के बाहर बड़े-बड़े लाउडस्पीकर लगाकर तेज आवाज में रॉक म्यूजिक बजाया। ताकि नोरिएगा मेंटल प्रेशर में टूट जाए। यह विश्व के सबसे अजीबोगरीब सैन्य अभियानों में से एक था। लगभग 10 दिन तक छिपे रहने के बाद आखिरकार 3 जनवरी 1990 को नोरिएगा ने आत्मसमर्पण कर दिया। अमेरिकी सैनिकों ने उसको हथकड़ी लगाई और जबरन अमेरिका ले गए। इसके बाद अमेरिका की अदालत में नोरिएगा पर मुकदमा चला और उन्हें अपराधी करार देकर 40 साल की सजा दे दी गई।
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