मधेपुरा के ग्वालपाड़ा प्रखंड के पड़ोकिया गांव में एक किशोरी के बैंक खाते में अचानक 759 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दिखाई देने से परिवार में कुछ देर के लिए खुशी की लहर दौड़ गई। इसके बाद जब रुपए निकालने की कोशिश की गई तो खाते से रुपए नहीं निकल रहा था। मामला ग्वालपाड़ा प्रखंड के पड़ोकिया वार्ड आठ का है। यहां रहने वाले अनिल दास की बेटी रूपा कुमारी (17) का सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में खाता है। शनिवार को रूपा ने आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AEPS) के जरिए गांव में ही सीएसपी से 800 रुपये की निकासी की।
लड़की के खाते में कहां से आए 7,59,69,51,951 रुपये
लेनदेन सफल होने के बाद सीएसपी संचालक ने जो रसीद दी, उसमें शेष राशि 7,59,69,51,951.16 रुपये दर्ज थी। इतनी बड़ी रकम देखकर किशोरी और उसके परिजन पहले हैरान रह गए। कुछ पल के लिए उन्हें लगा कि शायद खाते में कोई बड़ी राशि आ गई है। परिजनों ने बताया कि यह माइनर अकाउंट है और इसमें सामान्य तौर पर बहुत कम राशि रहती है। इससे पहले भी खाते से दो बार 5-5 हजार रुपये की निकासी की गई थी। रसीद में 800 रुपये की निकासी, बैंक का नाम और ट्रांजेक्शन सफल होने की जानकारी सही दर्ज थी, लेकिन बैलेंस के स्थान पर 759 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दिखाई दे रही थी।
सच्चाई पता चलने पर टूटा अरबपति बनने का सपना
इसके बाद गांव में यह चर्चा का विषय बन गया। परिवार ने आशंका जताई कि कहीं खाते में कोई गड़बड़ी या धोखाधड़ी तो नहीं हुई है और बैंक से सही बैलेंस की जानकारी देने की मांग की। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बिहारीगंज के सहायक शाखा प्रबंधक अनिमेष अंशु ने बताया कि दो-तीन दिन पहले बैंक के सिस्टम सॉफ्टवेयर का अपडेट किया गया है। इसी कारण कुछ खातों में गलत बैलेंस दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह तकनीकी समस्या है। अगले दो-तीन दिनों में स्वतः ठीक हो जाएगी। लड़की को जब सच्चाई पता चली तो उसका दिल टूट गया।
बता दें कि बिहार में इस तरह का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले सुपौल में भी हाल में ही इस तरह का मामला सामने आया था। सुपौल की आंगनबाड़ी सहायिका के खाते में 740 करोड़ रुपये दिख रहे थे। यह मामले भी इलाके में चर्चा का विषय बन गया था।
रिपोर्ट - मनीष कुमार, मधेपुरा
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