पटना: बिहार में नीतीश सरकार के मंत्री अशोक चौधरी विवाद में फंस गए हैं। असल में बिहार स्टेट यूनिवर्सिटी सर्विस कमीशन ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए 274 लोगों की नियुक्ति की सिफारिश की थी। 2020 में नियुक्ति का प्रॉसेस शुरू हुआ था। इसमें चौधरी ने पॉलिटिकल साइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए इंटरव्यू दिया था। 274 सिलेक्टेड कैंडीडेट्स की लिस्ट में अशोक चौधरी का नाम भी था, लेकिन जब असिस्टेंट प्रोफेसर्स को कॉलेज अलॉट हुए तो अशोक चौधरी का नाम गायब हो गया। आज बिहार के एजुकेशन मिनिस्टर डॉक्टर सुनील कुमार ने इसकी जो बजह बताई, वो सियासी मुद्दा बन गई। शिक्षा मंत्री ने कहा कि अशोक चौधरी के सार्टिफिकेट में कुछ गड़बड़ियां हैं, इसलिए उनकी नियुक्ति का मामला बिहार स्टेट यूनिवर्सिटी सर्विस कमीशन के पास भेजा गया है। जांच के बाद ही अशोक चौधरी की नियुक्ति पर फाइनल फैसला होगा।
तमाम नेताओं ने लगाए आरोप
शिक्षा मंत्री के इसी खुलासे पर विपक्ष के नेताओं ने अशोक चौधरी को घेरा। कांग्रेस के नेता असितनाथ तिवारी ने तो कह दिया कि अशोक चौधरी की PHD की डिग्री फर्जी थी, इसीलिए उनका नाम लिस्ट में नहीं है। इसके बाद RJD के नेताओं ने तो अशोक चौधरी के इस्तीफे का मांग तक कर दी। RJD के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि अशोक चौधरी के सारे डॉक्यूमेंट फर्जी हैं। अब इस बात की जांच होनी चाहिए कि इस फर्जीवाड़े में कौन कौन अफसर शामिल हैं।
बिहार RJD अध्यक्ष ने कही ये बात
तमाम आरोप प्रत्यारोप के बावजूद अशोक चौधरी इस मामले में कुछ नहीं बोले। मजे की बात ये है कि RJD के कुछ नेता अशोक चौधरी के बचाव में सामने आए। बिहार RJD के अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा कि उन्हें नहीं लगाता ये मामला फर्जीवाड़े का है। हो सकता है कि डाक्यूमेंटेस में अशोक चौधरी का जो नाम दर्ज हो उसमें स्पैलिंग की दिक्कत हो, आमतौर पर यही होता है इसलिए अशोक चौधरी पर बिना सबूत इल्जाम लगाना गलत है। मंगनी लाल मंडल ने जो कहा वो ठीक हो सकता है। क्योंकि पता ये लगा है कि अशोक चौधरी के पासपोर्ट, जाति प्रमाण पत्र समेत कई दस्तावेजों में कहीं उनका नाम अशोक कुमार तो कहीं अशोक चौधरी दर्ज है, इसलिए उनके दस्तावेजों को जांच के लिए भेजा गया है।
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