छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी में सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी तक सुनवाई टाल दी है। चैतन्य को ईडी ने 18 जुलाई को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। वह अभी भी जेल में बंद हैं। सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर चैतन्य बघेल ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी कुछ धाराओं को भी चुनौती दी है। ईडी के अधिकारी महादेव एप, डीएफ व कोयला और शराब घोटाले की जांच कर रहे हैं।
चैतन्य बघेल की याचिका पर सुनवाई जनवरी 2026 तक टल गई है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मामले को टुकड़ों में नहीं सुनने का फैसला किया। संयुक्त बेंच ने इस मामले को जनवरी के पहले सप्ताह में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले का किया था विरोध
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी को सही ठहराया था। हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ चैतन्य बघेल ने याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा की गई गिरफ्तारी को चुनौती दी है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में 17 अक्टूबर 2025 को फैसला सुनाया था। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर बहस पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है। चैतन्य बघेल जुलाई 2025 से जेल में हैं और फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है। फिलहाल केस चल रहा है और अगली बड़ी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जनवरी में होगी।
कांग्रेस सरकार में हुआ था घोटाला
शराब घोटाला मुख्य रूप से 2019-2023 (कांग्रेस सरकार के कार्यकाल) के दौरान हुआ, जिसमें अवैध देशी/विदेशी शराब बिक्री, फर्जी होलोग्राम, ओवर रेटिंग और राजनीतिक-अधिकारी मिलीभगत के आरोप हैं। ईडी ने अब तक कई गिरफ्तारियां की हैं और संपत्तियां कुर्क की हैं। ईडी के अनुसार घोटाले से राज्य खजाने को भारी नुकसान हुआ और 2,500 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध आय लाभार्थियों को मिली।
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