छत्तीसगढ़ कैबिनेट की बैठक में लिए गए कई अहम फैसले, किसानों के लिए हुआ बड़ा ऐलान
छत्तीसगढ़ कैबिनेट की बैठक में लिए गए कई अहम फैसले, किसानों के लिए हुआ बड़ा ऐलान
Edited By: Subhash Kumar@ImSubhashojha
Published : Feb 11, 2026 06:56 pm IST,
Updated : Feb 11, 2026 06:57 pm IST
बुधवार को सीएम विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई छत्तीसगढ़ कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। बैठक में किसानों के लिए भी बड़ा फैसला किया गया है।
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में कैबिनेट की बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय की नेतृत्व वाली सरकार ने कैबिनेट की बैठक में राज्य के किसानों को भी बड़ा तोहफा देने का ऐलान किया है। आइए जानते हैं इस बैठक के अहम फैसलों के बारे में।
कैबिनेट बैठक के बड़े फैसले
1. मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ के षष्ठम् विधान सभा के अष्टम् सत्र माह फरवरी-मार्च, 2026 हेतु माननीय राज्यपाल के अभिभाषण का अनुमोदन किया गया।
2. मंत्रिपरिषद द्वारा बजट अनुमान वर्ष 2026-27 का विधानसभा में उपस्थापन हेतु छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक-2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।
3. मंत्रिपरिषद ने राज्य में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से अंतर की राशि होली पर्व से पहले एकमुश्त भुगतान किए जाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25 लाख 24 हजार 339 किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत धान के मूल्य के अंतर की राशि के रूप में लगभग 10 हजार करोड़ रूपए का भुगतान होली त्यौहार से पहले एकमुश्त किया जाएगा।
₹3100 प्रति क्विंटल के मान से हो रही धान खरीद
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से की जा रही है, जो देश में सर्वाधिक है। बीते दो वर्षों में कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के किसानों को धान के मूल्य के अंतर के रूप में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। इस साल होली से पूर्व किसानों को 10 हजार करोड़ रूपए का भुगतान होने से यह राशि बढ़कर 35 हजार करोड़ रूपए हो जाएगी।