CBI Joint Director Convicted: दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट ने एक अहम फैसले में CBI के जॉइंट डायरेक्टर रामनीश और रिटायर्ड पुलिस अफसर वी. के. पांडे को दोषी ठहराया है। दोनों पर मारपीट, जबरन घर में घुसने और नुकसान पहुंचाने का आरोप साबित हुआ है। यह मामला साल 2000 में एक IRS अफसर के घर पर की गई रेड से जुड़ा है। कोर्ट ने साफ कहा कि यह रेड और गिरफ्तारी गलत इरादे से की गई थी। इसका मकसद एक सरकारी ट्रिब्यूनल (CAT) के आदेश को बेअसर करना था।
IRS अफसर के साथ की थी मारपीट
शिकायतकर्ता अशोक कुमार अग्रवाल, जो उस समय IRS अफसर थे, अपने घर पर 19 अक्टूबर, 2000 की सुबह मौजूद थे। आरोप है कि सुबह करीब 5 बजे CBI की टीम उनके घर पहुंची। टीम ने गार्ड के साथ मारपीट की और फिर दीवार फांदकर अंदर घुसी। इसके बाद, घर का दरवाजा तोड़ा और परिवार वालों को एक कमरे में बंद कर दिया। फिर अफसर को घसीटते हुए बाहर ले गए। इस दौरान, उन्हें चोट भी आई। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
कोर्ट ने अपने फैसले में कई अहम बातें कहीं
तीस हजारी कोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई जानबूझकर की गई थी। इसमें ताकत का गलत इस्तेमाल हुआ। अफसरों ने अपने अधिकारों का गलत उपयोग किया। घर का दरवाजा तोड़ना गैरकानूनी था। मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों से यह साबित हुआ। रेड पहले से प्लान की गई थी। CAT के आदेश को रोकने की कोशिश की गई।
अदालत ने बताई सोची-समझी साजिश
कोर्ट के मुताबिक, CAT ने पहले ही आदेश दिया था कि अफसर के सस्पेंशन की समीक्षा की जाए। लेकिन CBI ने जवाब देने के बजाय मीटिंग करके अगले ही दिन रेड करने का फैसला लिया। कोर्ट ने इसे एक सोची-समझी साजिश बताया। जिस IRS अफसर पर केस किया गया था, उन्हें बाद में CBI के दोनों मामलों में बरी कर दिया गया। इससे उनकी बात को मजबूती मिली।
पद का गलत तरीके से हुआ इस्तेमाल
कोर्ट ने कहा कि सरकारी अधिकारी भी कानून से ऊपर नहीं हैं। अगर कोई अपने पद का गलत इस्तेमाल करता है, तो उसे सजा मिलेगी। यह मामला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि पहली बार CBI के किसी मौजूदा इतने बड़े अधिकारी को इस तरह के मामले में दोषी ठहराया गया है।