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दिल्ली: फ्लाईओवर बनने में देरी पर एक्शन, ACB ने दर्ज की FIR; जानें कैसे हुआ गड़बड़ घोटाला?

 Reported By: Kumar Sonu, Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Jan 31, 2026 12:13 pm IST,  Updated : Jan 31, 2026 12:13 pm IST

दिल्ली में फ्लाईओवर बनने में देरी पर एक्शन हुआ है। इसमें अज्ञात सरकारी अधिकारियों और प्राइवेट ठेकेदारों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

ACB FIR Delhi- India TV Hindi
दिल्ली में फ्लाईओवर प्रोजेक्ट का काम समय पर पूरा नहीं होने पर FIR दर्ज हुई है। Image Source : PTI (प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में ACB ने बारापुला फ्लाईओवर के फेज-3 के निर्माण में देरी और लागत की बढ़ोतरी को लेकर FIR दर्ज की है। FIR में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7A और 13 के तहत कार्रवाई की गई। ACB की प्रारंभिक जांच के बाद FIR दर्ज हुई है। ये FIR अज्ञात सरकारी अधिकारियों और एक निजी ठेकेदार के खिलाफ हुई है। इस आर्टिकल में जानें पूरा मामला।

LG के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR

बता दें कि जांच में फ्लाईओवर निर्माण में असामान्य और अनुचित देरी के बारे में जिक्र है। परियोजना से जुड़े दस्तावेजों की जांच ACB ने शुरू कर दी है। LG ने अक्टूबर 2025 में इस मामले की जांच के आदेश दिए थे। फ्लाईओवर के निर्माण में हुई देरी के कारण सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हुआ है।

PWD को मिला सभी रिकॉर्ड सौंपने का निर्देश

जान लें कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सिफारिश पर दिल्ली के LG ने संज्ञान लिया था। 28 जुलाई 2025 को व्यय वित्त समिति (EFC) की बैठक में ये मामला उठा था। EFC ने गैर-सक्षम अधिकारियों की तरफ से मध्यस्थता स्वीकार करने और देरी पर गहन जांच की सिफारिश की है। PWD को ACB को सभी रिकॉर्ड सौंपने के निर्देश दिए हैं।

15 साल पहले इस प्रोजेक्ट को मिली थी मंजूरी

गौरतलब है कि यहां साढ़े 3 किलोमीटर लंबा, चार लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर, सराय काले खां में बारापुल्ला फ्लाईओवर से जुड़ना है। इस परियोजना को 2011 में मंजूरी मिली थी। दिसंबर 2014 में 1 260.63 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी। फिर अप्रैल 2015 में L&T को निर्माण कार्य का जिम्मा दिया गया था। इसके बाद अक्तूबर, 2017 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा होना था।

प्रोजेक्ट पूरा होने में क्यों हुई देरी?

बताया जा रहा है कि भूमि अधिग्रहण, पेड़ कटाई अनुमति और विभागीय लापरवाही से परियोजना में देरी हो रही है। अब जून, 2026 तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। अब तक 1,238.68 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। नई अनुमानित लागत 1,330 करोड़ रुपये हैं।

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