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दिल्ली कोरोना: ऑक्सीजन की कमी के चलते अस्पतालों में घटाई जा रही कोविड बेड की संख्या, Corona app में मिल रही ये जानकारी

Reported by: Bhaskar Mishra @mishrabhasker Published : Apr 24, 2021 05:45 pm IST, Updated : Apr 24, 2021 05:49 pm IST

देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना को लेकर अस्पतालों में स्थिति बिगड़ती जा रही है। जहां एक ओर अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सजीन की किल्लत बनी हुई है वहीं अब दूसरी ओर अस्पतालों में कोविड बेड भी कम किए जा रहे हैं।

ऑक्सीजन की कमी के चलते...- India TV Hindi
Image Source : PTI/REPRESENTATIONAL IMAGE ऑक्सीजन की कमी के चलते अस्पतालों में घटाई जा रही कोविड बेड की संख्या

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना को लेकर अस्पतालों में स्थिति बिगड़ती जा रही है। जहां एक ओर अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सजीन की किल्लत बनी हुई है वहीं अब दूसरी ओर अस्पतालों में कोविड बेड भी कम किए जा रहे हैं। ऑक्सीजन की कमी की वजह से दिल्ली सरकार के हॉस्पिटल में कोरोना बेड्स कम किये जा रहे हैं। राजीव गांधी सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल (RGSSH) में पिछले 2 दिनों में 650 से घटाकर 350 बेड्स कर दिए गए हैं।

ऑक्सीजन की कमी के चलते अस्पतालों में घटाई जा रही कोविड बेड की संख्या

दिल्ली कोरोना app पर भी बेडस की संख्या घटा दी गयी है। RGSSH में 650 से 350 बेड्स कर दिए गए हैं। वहीं सूत्रों के मुताबिक, GTB में 1500 से 700 बेड्स कर दिए गए हैं। दिल्ली में कोरोना की दूसरी लहर से हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ऑक्सीजन की कमी से दिल्ली में ICU बेड की संख्या घटाई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, आज ही अस्पतालों को बेड की संख्या कम करने के आदेश दिए गए हैं। दिल्ली के अस्पतालों में कोरोना को लेकर किए गए इंतजाम पर आज शनिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी की है।

COVID-19 beds in delhi
Image Source : INDIA TVCOVID-19 beds in delhi 

कोविड की दूसरी लहर सुनामी है: दिल्ली उच्च न्यायालय 

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मई के मध्य में कोविड-19 की दूसरी लहर की चरम स्थिति आने की आशंका से निपटने की तैयारियों के बारे में केंद्र से जानकारी तलब करते हुए मामलों में तेज़ बढ़ोतरी को ‘सुनामी’ बताया और आगाह किया कि वह यहां अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति में अड़चन पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति को ‘लटका’ देगा। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने उक्त टिप्पणी दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में बढ़ते ऑक्सीजन संकट के मुद्दे पर छुट्टी वाले दिन सुनवाई करते हुए की। 

अदालत ने कहा कि संक्रामक रोग की मृत्यु दर कम है और जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है उनकी इस बीमारी से मौत होगी, लेकिन समस्या यह है कि जिन लोगों को बचाया जा सकता था, वे भी मर रहे हैं। पीठ ने कहा, “ मृत्यु दर को कम करने की जरूरत है।” 

मई मध्य में चरम पर होगी कोरोना की स्थिति

कानपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के वैज्ञानिकों की एक टीम के अध्ययन का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि उसका आकलन है कि कोविड की इस लहर की चरम स्थिति मई के मध्य में आएगी। अदालत ने कहा, “ हम इसे लहर कह रहे हैं, यह असल में एक सुनामी है।” इसके साथ अदालत ने चरम स्थिति आने पर केंद्र से अवसंरचना, अस्पताल, चिकित्सा कर्मियों, दवाई, टीका और ऑक्सीजन के आशय में तैयारियों को लेकर सवाल किया।

केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मई और जून में मामलों की संख्या में तेज बढ़ोतरी हो सकती है और देश को बदतर स्थिति के लिए तैयार रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और अन्य इस पर काम कर रहे हैं और ऑक्सीजन आयात करने का फैसला किया गया है और जहां भी संभव हो, वहां से ऑक्सीजन उत्पन्न करने की सम्भावना तलाश रहे हैं। अदालत गंभीर रूप से बीमार कोविड मरीजों के इलाज के लिए ऑक्सीजन की कमी को लेकर महाराजा अग्रसेन अस्पताल, जयपुर गोल्डन अस्पताल, बत्रा अस्पताल और सरोज सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के वकील के अभिवेदनों पर सुनवाई कर रही थी। 

अदालत ने दिल्ली सरकार से केंद्र, राज्य या स्थानीय प्रशासन के किसी भी अधिकारी द्वारा ऑक्सीजन की आपूर्ति को बाधित करने के एक उदाहरण के बारे में बताने को कहा है। पीठ ने कहा, “हम उस व्यक्ति को लटका देंगे। हम किसी को भी नहीं बख्शेंगे। ” अदालत ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह स्थानीय प्रशासन के ऐसे अधिकारियों के बारे में केंद्र को भी बताए ताकि वह उनके खिलाफ कार्रवाई कर सके। 

उच्च न्यायालय ने केंद्र से भी सवाल किया कि दिल्ली के लिए आवंटित प्रतिदिन 480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन उसे कब मिलेगी? अदालत ने कहा, “ आपने (केंद्र ने) हमें (21 अप्रैल को) आश्वस्त किया था कि दिल्ली में प्रतिदिन 480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचेगी। हमें बताएं कि यह कब आएगी?” दिल्ली सरकार ने अदालत को सूचित किया कि उसे पिछले कुछ दिनों से रोजाना सिर्फ 380 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिल रही है और शुक्रवार को उसे करीब 300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिली थी। इसके बाद अदालत ने केंद्र से सवाल किया। सुनवाई के दौरान, अदालत ने दिल्ली सरकार के अधिकारियों से भी सवाल किया कि उन्होंने केंद्र द्वारा राष्ट्रीय राजधानी को आवंटित ऑक्सीजन की आपूर्ति हासिल करने के लिए टैंकरों को सुरक्षित करने के लिए क्या कोशिशें की हैं?

ऑक्सीजन संकट के चलते कम मरीजों को भर्ती करने पर विचार करे सरकार: सर गंगाराम अस्पताल 

सर गंगाराम अस्पताल की ओर से शनिवार को सरकार से अनुरोध किया गया कि दिल्ली में गहराते ऑक्सीजन संकट के बीच वह अस्पताल में भर्ती किए जाने वाले मरीजों की संख्या को घटाने पर विचार करे। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को सर गंगाराम अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण 25 गंभीर मरीजों की मौत हो गई थी। गंगाराम अस्पताल के प्रमुख डॉ डी एस राणा ने कहा, ‘‘मैं केंद्र और राज्य सरकार दोनों से मदद की अपील करता हूं। एक ओर तो उन्होंने कोविड बेड की संख्या बढ़ा दी है और दूसरी ओर वे पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं कर पा रहे। ऐसे में हम कैसे काम करेंगे?’’ उन्होंने कहा, ‘‘यदि यह कोविड सुनामी है और सरकार ने आपदा प्रबंधन कानून लागू किया है तो उन्हें इसी के मुताबिक काम करना चाहिए। हम चाहते हैं कि इसमें तुरंत हस्तक्षेप किया जाए।’’ डॉ. राणा ने कहा, ‘‘सरकार भरसक प्रयास कर रही है लेकिन शायद वह खुद भी लाचार है। लेकिन फिर यह बात उन्हें स्वीकार करनी चाहिए और भर्ती किए जाने वाले मरीजों की संख्या घटानी चाहिए।’’  

दिल्ली में जारी ऑक्सीजन संकट के बीच जयपुर गोल्डन अस्पताल में 20 मरीजों की मौत 

ऑक्सीजन की कमी को लेकर पैदा हुए गंभीर संकट के बीच दिल्ली के जयपुर गोल्डन अस्पताल में शनिवार को 20 अत्यंत बीमार कोरोना मरीजों की ऑक्सीजन नहीं मिलने से मौत हो गयी। गंभीर रूप से बीमार कोविड मरीजों की जान बचाने के लिए ऑक्सीजन बहुत अहम है।  

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