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दिल्ली-NCR की खराब हवा में घुटने लगा दम, मरीजों की आई बाढ़, डॉक्टरों ने दी सावधानी बरतने की सलाह

 Edited By: Khushbu Rawal
 Published : Oct 27, 2022 11:08 pm IST,  Updated : Oct 27, 2022 11:08 pm IST

दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता बिगड़ती जा रही है और यह 'बहुत खराब' श्रेणी में आ चुकी है, ऐसे में शहर के प्रमुख पल्मोनोलॉजिस्टों ने गुरुवार को कहा कि वे ऐसे कई नए रोगियों को देख रहे हैं, जिन्हें सर्दी आने के साथ कभी सांस की बीमारी नहीं हुई थी।

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दिल्ली में वायु प्रदूषण Image Source : PTI

नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता बिगड़ती जा रही है और यह 'बहुत खराब' श्रेणी में आ चुकी है, ऐसे में शहर के प्रमुख पल्मोनोलॉजिस्टों ने गुरुवार को कहा कि वे ऐसे कई नए रोगियों को देख रहे हैं, जिन्हें सर्दी आने के साथ कभी सांस की बीमारी नहीं हुई थी। उन्होंने लोगों को निमोनिया, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों की अन्य बीमारियों से भी सावधान किया और बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी।

शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल के निदेशक और पल्मोनोलॉजी के एचओडी, विकास मौर्य ने बताया, "ओपीडी में रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और जिन्हें निमोनिया, ब्रोंकाइटिस, वायरल संक्रमण और संबंधित यूआरआई, एलआरटीआई, अस्थमा और सीओपीडी उत्तेजना के लक्षण हैं, उन्हें भर्ती होने की जरूरत है। यह सामान्य प्रतीत होता है, जैसा कि हर साल सर्दी के आगमन के साथ देखा जाता है। इस स्थिति के लिए कुछ हद तक प्रदूषण जिम्मेदार है।"

यह देखना बाकी है कि अगले कुछ दिनों या हफ्तों में सांस की बीमारियों पर इस मौसम में प्रदूषण का कितना असर पड़ता है। उन्होंने कहा, "इस समय दिन अभी भी गर्म और धूप वाले हैं, इसलिए प्रदूषण भी फैलता है, लेकिन इसके दुष्परिणाम उतने नहीं हो पाते हैं, जितने कि सर्दी के मौसम में होते हैं।" बुधवार को दिल्ली के पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 का प्रदूषण स्तर 24 घंटे के लिए राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से तीन से चार गुना अधिक था। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, वैशाली के पल्मोनोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार मयंक सक्सेना के अनुसार, आने वाले महीनों में वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका है, जैसा कि हर साल होता है।

सक्सेना ने बताया, "हमने बहुत से नए रोगियों को देखा है, जिन्हें कभी भी सांस की बीमारी नहीं थी, उनकी आंखों में अनियंत्रित खांसी, सर्दी और जलन हो रही थी। पहले से मौजूद सांस की बीमारी वाले मरीजों में लक्षणों में मध्यम से गंभीर तक वृद्धि हो सकती है।" उन्होंने कहा, "इस समय अस्थमा के बहुत अधिक बढ़ने की संभावना रहती है। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफाइब्रिलेटर (आईसीडी) के मरीज जो पहले से ही गंभीर स्थिति में हैं, उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए प्रदूषण को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए और एन-95 मास्क, एचईपीए फिल्टर और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।"

दिवाली पर पटाखों से हवा के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण भी होता है। पटाखे जलाने पर जहरीले वायु प्रदूषक जैसे कार्बन डाइऑक्साइड,नाइट्रोजन ऑक्साइड, सोडियम डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन ट्राइऑक्साइड, ब्लैक कार्बन और पार्टिकुलेट छोड़ते हैं, जिससे धुएं के घने बादल बनते हैं। यह आंखों, गले, फेफड़े, हृदय और त्वचा को प्रभावित करता है।

मैक्स अस्पताल, गुरुग्राम में पल्मोनोलॉजी विभाग के एसोसिएट सलाहकार मिताली अग्रवाल ने कहा, "धूल की सघनता बढ़ जाती है और इसलिए यह अस्थमा और एलर्जी ब्रोंकाइटिस के इतिहास वाले लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। उनके द्वारा जारी वायु प्रदूषक सीओपीडी और आईएलडी जैसी पुरानी श्वसन संबंधी बीमारियों का कारण बनते हैं, जिससे अस्पताल में भर्ती होने की दर और दवा का उपयोग बढ़ जाता है।" विशेषज्ञों ने कहा कि जहरीली गैसें स्वस्थ लोगों में भी गंभीर प्रतिक्रियाशील वायुमार्ग की शिथिलता (RADS) का कारण बन सकती हैं।

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