Tuesday, February 10, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. दिल्ली
  3. दिल्ली वाले रहें तैयार! कानपुर से आए प्लेन ने की क्लाउड सीडिंग

दिल्ली वाले रहें तैयार! कानपुर से आए प्लेन ने की क्लाउड सीडिंग

Reported By : Bhaskar Mishra Edited By : Khushbu Rawal Published : Oct 28, 2025 10:29 am IST, Updated : Oct 28, 2025 07:50 pm IST

देश की राजधानी दिल्ली को प्रदूषण और धुंध से राहत दिलाने के लिए क्लाउड सीडिंग यानी कृत्रिम बारिश कराई जा रही है। दिल्ली के खेकड़ा, करोल बाग, मयूर विहार, बुराड़ी समेत कई इलाकों में बादलों में केमिकल डाला गया है।

artificial rain- India TV Hindi
Image Source : PTI प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली में एक ओर महापर्व छठ का आज जोर-शोर से समापन हुआ है, तो वहीं यहां की हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए आज कृत्रिम बारिश की जा रही है। राष्ट्रीय राजधानी में कानपुर से आए प्लेन ने क्लाउड सीडिंग की। दिल्ली के खेकड़ा, करोल बाग, मयूर विहार, बुराड़ी समेत कई इलाकों में बादलों में केमिकल डाला गया है। क्लाउड सीडिंग से बारिश होने में 40 मिनट से लेकर 4 घंटे तक वक्त लग सकता है।

मौसम पर टिकी निगाहें

कानपुर से आए विमान ने बुराड़ी के पास उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में सीधे जाकर ट्रायल किया। मौसम अनुकूल रहा तो आज शाम ही क्लाउड सीडिंग की दूसरी कोशिश भी की जाएगी।

यह ट्रायल राजधानी में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कृत्रिम वर्षा कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। यह सर्दियों के दौरान बिगड़ती वायु गुणवत्ता को सुधारने की दिल्ली सरकार की वृहद रणनीति का हिस्सा है। कृत्रिम वर्षा ट्रायल की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। पिछले हफ्ते सरकार ने बुराड़ी क्षेत्र के ऊपर एक ट्रायल उड़ान भी संचालित की थी। ट्रायल के दौरान विमान से सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड जैसे यौगिकों की कम मात्रा छोड़ी गई, जो कृत्रिम वर्षा उत्पन्न करने में सहायक होते हैं। हालांकि, वातावरण में नमी का स्तर 20 प्रतिशत से कम होने के कारण बारिश नहीं करायी जा सकी क्योंकि कृत्रिम बारिश के लिए सामान्यत: 50 प्रतिशत की नमी की आवश्यकता होती है।

कैसे कराई जाती है आर्टिफिशियल बारिश?

कृत्रिम वर्षा या आर्टिफिशियल बारिश से मतलब एक विशेष प्रक्रिया द्वारा बादलों की भौतिक अवस्था में कृत्रिम तरीके से बदलाव लाना होता है, जो वातावरण को बारिश के अनुकूल बनाता है। बादलों के बदलाव की यह प्रक्रिया क्लाउड सीडिंग कहलाती है।

आर्टिफिशियल बारिश में भीग गए तो क्या होगा?

आर्टिफिशियल बारिश या क्लाउड सीडिंग एक मौसम परिवर्तन तकनीक है, जिसमें विमान या फिर ड्रोन के जरिए बादलों में खास रसायनों को छिड़का जाता है ताकि बारिश हो पाए। क्लाउड सीडिंग के दौरान निकलने वाले मुख्य रसायनों में सिल्वर आयोडाइड, पोटेशियम आयोडाइड, ठोस कार्बन डाइऑक्साइड और कभी-कभी सोडियम क्लोराइड भी शामिल होती है इसमें सिल्वर आयोडाइड सबसे ज्यादा आम है क्योंकि यह बर्फ की संरचना की नकल करता है और बादलों में पानी की बूंद को आपस में मिलकर बारिश के रूप में गिरने में काफी मदद करता है।

वैसे तो आर्टिफिशियल बारिश में भीगना सुरक्षित है क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाले रसायन काफी कम मात्रा में होते हैं लेकिन संवेदनशील त्वचा, एलर्जी या फिर सांस से संबंधित समस्याओं वाले लोगों को इसके संपर्क में कम आना चाहिए। इससे हल्की जलन या फिर बेचैनी हो सकती है। यह उन लोगों की परेशानी की वजह बन सकती है जिनहें अस्थमा या ब्रोंकाइटिस हैं।

IIT कानपुर ने संभाला जिम्मा

दिल्ली सरकार ने 25 सितंबर को आईआईटी कानपुर के साथ कृत्रिम वर्षा के पांच ट्रायल करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने पहले आईआईटी कानपुर को एक अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच किसी भी समय ट्रायल करने की अनुमति दी थी। इसके अलावा, केंद्रीय पर्यावरण, रक्षा और गृह मंत्रालयों, उत्तर प्रदेश सरकार, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो समेत केंद्र और राज्य की 10 से अधिक एजेंसियों से भी मंजूरी प्राप्त की जा चुकी है। (भाषा इनपुट्स के साथ)

यह भी पढ़ें-

आज का मौसमः चक्रवाती तूफान का बिहार समेत 12 राज्यों में असर, आंधी के साथ बारिश की चेतावनी; सर्दी को लेकर ताजा अपडेट

दिल्ली-NCR के लोगों के लिए खुशखबरी, जल्द मिल सकती है वायु प्रदूषण से राहत, जानें आज कितना है AQI

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। दिल्ली से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।

Advertisement
Advertisement
Advertisement