नई दिल्ली: दिल्ली के द्वारका स्थित नवादा से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां 2 लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। दोनों के शव कमरे से बरामद हुए हैं। दोनों की उम्र 50 और 48 वर्ष बताई जा रही है।
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कुछ दिन पहले ही किराए पर लिया था कमरा
मिली जानकारी के मुताबिक, जिन 2 लोगों के शव बरामद हुए हैं, उन्होंने कुछ दिन पहले ही किराए पर कमरा लिया था। पुलिस के मुताबिक, उनके शरीर पर कोई जाहिरा चोट के निशान नहीं मिले हैं। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
पुलिस ने क्या बताया?
पुलिस ने बताया, "शाम लगभग 6:55 बजे, उत्तम नगर पुलिस स्टेशन में एक पीसीआर कॉल प्राप्त हुई, जिसमें कॉलर ने बताया कि मेट्रो पिलर नंबर 743 के पास, मोहन गार्डन स्थित एक घर में दो शव मिले हैं। मृतकों की पहचान देवेंद्र (उम्र 50 वर्ष), निवासी मोहन गार्डन, दिल्ली और अमित कुमार (उम्र 48 वर्ष), निवासी जेजे कॉलोनी, हस्तसाल, दिल्ली के रूप में हुई है।
दोनों 65 वर्षीय नरेश के किराए के मकान में रह रहे थे। आरोपानुसार, अपराध टीम और एफएसएल विशेषज्ञ मौके पर पहुंचे और शवों का निरीक्षण किया। शवों पर कोई प्रत्यक्ष चोट के निशान नहीं थे। बीएनएसएस की धारा 194 के तहत जांच कार्यवाही शुरू कर दी गई है। मामले में आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी।
400 रुपये के लिए युवक की हत्या
दिल्ली से ही एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है कि यहां महज 400 रुपए के लिए एक युवक की हत्या कर दी गई। घटना दयालपुर इलाके की है। मृतक महज 26 साल का था। इस घटना में 3 नाबालिगों को भी पकड़ा गया है।
पुलिस के मुताबिक, मृतक की पहचान 'न्यू मुस्तफाबाद' निवासी कैफ के रूप में हुई है और उस पर शुक्रवार की शाम को हमला हुआ था, जिसके बाद उसे हॉस्पिटल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मिली जानकारी के मुताबिक, मृतक ने हमलावरों से 400 रुपए उधार लिए थे, जिसको लेकर दोनों पक्षों में बहस हुई और फिर हमलावरों ने कैफ पर चाकू से हमला कर दिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
गौरतलब है कि दिल्ली में आए दिन इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, जहां छोटे से विवाद में लोग एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन जाते हैं। ऐसा लगता है कि जैसे लोगों में संवेदनशीलता खत्म होती जा रही है। युवाओं में बढ़ रहा गुस्सा बहुत घातक है, ऐसे में युवाओं को सही शिक्षा और दिशा देने की जरूरत है। कई मामलों में देखा गया है कि हत्या जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होने वाले नाबालिग होते हैं। ये बच्चे कहां से अपराध की शिक्षा ले रहे हैं? इन्हें कौन ये सिखा रहा है? ये भी एक बड़ा सवाल है।