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CBSE ने रिजल्ट जारी करने से पहले स्कूलों को दिया ये निर्देश, अब छात्रों को करना होगा यह काम

Edited By: Shailendra Tiwari @@Shailendra_jour Published : May 09, 2025 11:05 pm IST, Updated : May 09, 2025 11:09 pm IST

CBSE बोर्ड जल्द ही कक्षा 10वीं और 12वीं का रिजल्ट जारी करेगा लेकिन इससे पहले स्कूलों को एक खास निर्देश दिया है, जिसके बाद छात्रों को प्रार्थना के दौरान उसे करना होगा।

CBSE- India TV Hindi
Image Source : PEXABAY प्रार्थना करते छात्र

एक तरफ जहां कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों को बोर्ड परीक्षा 2025 के रिजल्ट का इंतजार है, तो दूसरी ओर सीबीएसई ने सभी संबध्द स्कूलों को नए एकेडमिक सेशन से एक निर्देश लागू करने को कहा है। सीबीएसई ने सभी स्कूलों से कहा कि वे रोज अपने स्कूल में सुबह प्रार्थना के समय छात्रों से पॉजिटिव अफरमेशन यानी अच्छे विचार कहने को कहें। यह निर्देश आने वाले शैक्षणिक सत्र 2025-26 से ही लागू होगा।

बच्चों को मिलेगी मदद

जारी किए गए पत्र में बोर्ड ने कहा कि यह कदम छात्रों के सोच में पॉजटिविटी लाएगा। आगे कहा गया प्रार्थना के समय कहे गए छोटे-छोटे अफरमेशन छात्रों के दिमाग पर अमिट छाप छोड़ेंगे जिससे वे अच्छाई की राह पर ही चलेंगे। आगे कहा गया कि इन विचारों के साथ नियमित रूप से जुड़ने वाले व्यक्ति के मेंटल हेल्थ, आत्मविश्वास और एकाग्रता में वृद्धि देखी गई है।

बोर्ड ने कहा कि इसका उद्देश्य बच्चों को महज शैक्षणिक रूप से, बल्कि भावनात्मक रूप से भी विकसित करने में मदद करना है और उन्हें आत्मविश्वासी व्यक्ति बनने में मदद करना है।

कौन-कौन से कथन कहने होंगे?

  • मैं हमेशा खुश रहती हूँ/रहती हूँ।
  • मैं हर स्थिति में शांत और स्थिर रहता हूँ/रहती हूँ।
  • मेरी एकाग्रता और थमरन शसि महान हैं।
  • मैं स्वस्थ भोजन ग्रहण करता/करती हूं; मेरा बॉडी पूर्णतः स्वस्थ और रोगमुक्त है।
  • मैं गैजेट्स का उपयोग केवल पढ़ाई के लिए करता/करती हूं।
  • मैं सबका सम्मान करता/करती हूं। मैं प्रकृति का भी सम्मान करता/करती हूं।

गाइडलाइन भी किए हैं जारी

सीबीएसई ने स्कूलों के लिए कुछ गाइडलाइन भी जारी किए हैं:

  • स्कूल हर सुबह असेंबली के दौरान 1-2 छोटे-छोटे कथन कह सकते हैं।
  • कथन या अफरमेशन आयु के मुताबिक, समावेशी और सहानुभूति, साहस और आत्म-मूल्य के मूल्यों पर आधारित होने चाहिए। स्कूल अपने मूल मूल्यों के साथ कथन को और भी अनुकूलित कर सकते हैं।
  • कथन को सुनाने या बनाने में छात्रों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
  • स्कूल अपनी मौजूदा असेंबली स्ट्रक्चर के साथ नए फॉर्मेट के रूप देने के लिए स्वतंत्र हैं।
  • मूल्य शिक्षा प्रयासों के हिस्से के रूप में स्कूल उन्हें बुलेटिन बोर्ड या कक्षाओं में दिखा सकते हैं।
  • छात्र के सुलभता के अनुरूप भाषा का विकल्प अपनाया जा सकता है, यानी छात्र जो चाहे भाषा कथन में इस्तेमाल कर सकता है।

Notice

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