पणजी: निर्देशक कबीर खान ने अपनी 'काबुल एक्सप्रेस', 'न्यूयॉर्क' और हाल में आई 'फैंटम' जैसी फिल्मों में खुलकर आतंकवाद के मुद्दे पर बात की है, लेकिन वह कहते हैं कि सिनेमा वैश्विक स्तर पर फैलती इस समस्या से लड़ नहीं सकता। यह कई देशों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है।
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सलमान खान स्टारर बजरंगी भाईजान के निर्देशक कबीर का कहना है कि सभी फिल्मकार या उनमें से कुछ उनकी तरह नहीं सोचते। हो सकता है कि कुछ सिनेमा के माध्यम से आतंकवाद के मुद्दे से निपटने में सक्षम हों और कुछ नहीं।
यहां भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह (इफ्फी) से इतर एक साक्षात्कार में कबीर ने कहा, "सिनेमा धर्मयुद्ध (कू्रसेड्स) को लेकर नहीं चल सकता, यह अंतत: फिल्मकार विशेष पर निर्भर करता है। यदि मैं मजबूती से आतंकवाद की खिलाफत करता हूं तो मैं उस भावना को व्यक्त करूंगा। लेकिन मैं नहीं जानता कि क्या मैं और ज्यादा फिल्मकारों को आतंकवाद के खिलाफ फिल्म बनाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास करूंगा। वैश्विक आतंकवाद को लेकर कई फिल्में बनाई जा रही हैं।"
उन्होंने कहा कि सिनेमा लोगों को इस मुद्दे पर सोचने, बहस करने और विमर्श करने के लिए प्रेरित कर सकता है। यह कुछ सवालों को खड़ा करने में मददगार है। लेकिन यह आतंकवाद से सीधे लड़ने में मदद नहीं कर सकता। उनके अनुसार यह सिनेमा के ऊपर एक बड़ी जिम्मेदारी है।
कबीर ने शुरूआत में अफगानिस्तान में डॉक्युमेंट्री फिल्म बनाने का काम किया था और बाद में 2006 में काबुल एक्सप्रेस बनाई थी। यह फिल्म युद्धरत अफगानिस्तान में उनके अनुभवों पर आधारित थी।