अभिनय की दुनिया में कदम रखना और अपनी पहली ही फिल्म से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना कोई मामूली उपलब्धि नहीं है। सिनेमा जगत में अक्सर बाल कलाकारों को केवल एक सहायक भूमिका के तौर पर देखा जाता है, लेकिन कुछ ऐसे विरल कलाकार होते हैं जो अपनी मासूमियत और परिपक्व अदाकारी के संगम से मुख्य धारा के अभिनेताओं को भी कड़ी टक्कर देते हैं। एक कलाकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है बचपन की उस छवि को तोड़कर एक गंभीर अभिनेता के रूप में खुद को स्थापित करना। 'आई एम कलाम' के छाटू ने बचपन में ही ये मुकाम हासिल कर लिया। बतौर लीड हीरो उन्होंने फिल्म की कमान संभाली और इसके लिए नेशनल अवॉर्ड जीतकर देश भर में चर्चा का केंद्र बन गए। ये किरदार सालों बाद भी लोगों के जेहन में है, इसे निभाया था हर्ष मायर ने, जो छोटी उम्र में ही फनकार बन गए और अपनी कला का लोहा मनवाया। अब वो बीते वक्त के साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपनी अलग सल्तनत खड़ी कर रहे हैं।
क्या थी 'आई एम कलाम' की कहानी
हर्ष मायर के करियर का मील का पत्थर साल 2010 में आई फिल्म 'आई एम कलाम' रही। निर्देशक नीला माधव पांडा की इस फिल्म में हर्ष ने 'छोटू' नामक एक ऐसे बालक का किरदार निभाया, जो गरीबी की बेड़ियों में जकड़े होने के बावजूद डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसा बनने की हसरत रखता है। राजस्थान की तपती धूप और एक ढाबे पर काम करने की विवशता के बीच, हर्ष के अभिनय ने दर्शकों को भावनाओं के उस समंदर में डुबो दिया जहाँ उम्मीद कभी नहीं मरती। उनकी इस अविस्मरणीय परफॉर्मेंस के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। गुलशन ग्रोवर जैसे अनुभवी सितारों के सामने भी हर्ष की चमक फीकी नहीं पड़ी।
'गुल्लक' के जरिए ओटीटी पर धाक
समय बदला और मनोरंजन का माध्यम भी, लेकिन हर्ष की प्रतिभा और निखरती गई। सोनीलिव की लोकप्रिय सीरीज 'गुल्लक' में हर्ष ने 'अमन मिश्रा' का किरदार निभाकर आधुनिक मध्यमवर्गीय परिवारों के दिलों में जगह बना ली। इस सीरीज में उनके अभिनय की स्वाभाविकता ही थी जिसने इसे IMDb पर 9.1 जैसी शानदार रेटिंग दिलाने में मदद की। जमील खान और गीतांजलि कुलकर्णी के साथ उनकी केमिस्ट्री ने दर्शकों को हंसाया भी और रुलाया भी। 'गुल्लक' की सफलता ने यह साबित कर दिया कि हर्ष अब केवल एक बाल कलाकार नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया के एक भरोसेमंद सितारे बन चुके हैं।
विविध भूमिकाएं और भविष्य की योजनाएं
हर्ष मायर ने अपने करियर में कभी भी खुद को एक ही सांचे में नहीं बांधा। उन्होंने 'हिचकी', 'कनपुरिये', और 'आधा फुल' जैसे विभिन्न प्रोजेक्ट्स के माध्यम से अपनी वर्सटैलिटी (बहुमुखी प्रतिभा) का प्रदर्शन किया है। उनकी अदाकारी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे पर्दे पर अभिनय करते नहीं दिखते, बल्कि उस किरदार को जीते हैं। वर्कफ्रंट की बात करें तो हर्ष जल्द ही रमन भारद्वाज की फिल्म 'स्कॉलरशिप' में दिखाई देंगे। इस फिल्म को लेकर चर्चा इसलिए भी अधिक है क्योंकि इसमें वे कल्कि कोचलिन और कोंकणा सेन शर्मा जैसी सशक्त अभिनेत्रियों के साथ स्क्रीन साझा करेंगे।
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