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21 में उम्र में फतेह की IIT से लेकर UPSC का परीक्षा, फिर रूह की पुकार पर छोड़ी IAS की कुर्सी, रुतबा छोड़ बना सुरों के सरताज

 Written By: Jaya Dwivedie @JDwivedie
 Published : May 15, 2026 10:10 am IST,  Updated : May 15, 2026 10:10 am IST

IIT और UPSC फतह करने वाले शख्त अगर सब छोड़ दे तो लोगों को हैरानी होगी, ऐसा ही एक IAS अधिकारी ने किया। संगीत के प्रति जुनून के कारण IAS की नौकरी छोड़ दी। IIT दिल्ली से पढ़ने के बावजूद इन्होंने म्यूज को चुना।

IAS kashish Mittal- India TV Hindi
कशिश मित्तल। Image Source : KASHISH MITTAL INSTAGRAM

भारत में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास करना केवल एक करियर नहीं, बल्कि इसे सामाजिक प्रतिष्ठा और बड़ी जीत माना जाता है। सालों की मेहनत और हजारों में से एक चुने जाने के बाद मिली उस चमकदार दुनिया को कोई ठुकरा दे तो यह बात किसी को भी आसानी से हजम नहीं होती। सोचिए कि कोई शख्स IITian बनने के बाद IAS बन जाए, कुछ साल रुतबे वाली जिंदगी जी ले और फिर सब अचानक ही छोड़ दे तो जाहिर तौर आप हैरान होंगे, कशिश मित्तल की कहानी भी इसी तरह हैरान करने वाली है। उन्होंने उस सफलता को हासिल किया जिन्हें छूना लाखों का ख्वाब होता है, लेकिन फिर अपनी रूह की पुकार सुनने के लिए उन्होंने उस सजी-धजाई दुनिया को अलविदा कह दिया।

मेधावी छात्र से प्रशासनिक शिखर तक का सफर

कशिश का शैक्षणिक और करियर ग्राफ किसी शानदार प्रतिभा की गवाही देता है। जालंधर में जन्मे और दिल्ली के माहौल में रचे-बसे कशिश ने अपनी मेधा का लोहा शुरू से ही मनवा लिया था। IIT दिल्ली से कंप्यूटर साइंस में बीटेक और JEE में ऑल इंडिया छठी रैंक हासिल करना उनकी असाधारण प्रतिभा का परिचय था। इसके बाद महज 21 साल की उम्र में IAS अधिकारी बनकर वो अपनी प्रतिभा को एक कदम और आगे ले गए। प्रशासनिक सेवा के नौ सालों के दौरान उन्होंने चंडीगढ़ के अतिरिक्त उपायुक्त और तवांग (अरुणाचल प्रदेश) के उपायुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किए। नीति आयोग में अहम भूमिका निभाने वाले कशिश जब करियर की ऊंचाइयों पर थे, तब उनके भीतर का कलाकार किसी और ही तृप्ति की तलाश में था।

संगीत रगों में दौड़ता था

सफलता की इस आपाधापी के बीच कशिश का असली सुकून शास्त्रीय संगीत की साधना में छिपा था। उनके पिता एक वरिष्ठ IPS अधिकारी थे और मां ने बचपन में ही उनके भीतर सुरों के बीज बो दिए थे। महज आठ साल की उम्र से संगीत की तालीम और ग्यारह की उम्र में प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति देने वाले कशिश के लिए संगीत कोई शौक नहीं, बल्कि एक पहचान थी। उन्होंने आगरा घराने की बारीकियां अपने गुरु पंडित यशपाल से सीखीं। UPSC और IIT की तैयारी के दबाव में भी उनके तानपुरे की गूंज कभी मध्यम नहीं पड़ी। आज वे न केवल एक सफल उद्यमी हैं, बल्कि आकाशवाणी और दूरदर्शन के 'ए' ग्रेड कलाकार भी हैं, जिन्हें नाद श्री और सरस्वती सम्मान जैसे अलंकारों से नवाजा जा चुका है।

IAS का मोह त्यागकर चुनी नई राह

साल 2019 कशिश के जीवन का एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। जब प्रशासनिक जिम्मेदारियों और संगीत की साधना के बीच द्वंद्व बढ़ा तो उन्होंने पूरी स्पष्टता के साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया। आईएएस की कुर्सी छोड़ने के बाद उन्होंने तकनीक की दुनिया की ओर रुख किया और माइक्रोसॉफ्ट में पांच साल तक एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मार्च 2025 में उन्होंने 'दिशा AI' नामक स्टार्टअप की नींव रखी, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सामाजिक सरोकारों के मिलन का प्रतीक है। उनके लिए यह बदलाव किसी पद का त्याग नहीं, बल्कि खुद को तलाशने की एक प्रक्रिया थी।

वायरल सुरीली आवाज और सादगी

आज कशिश मित्तल केवल एक पूर्व आईएएस या तकनीकी विशेषज्ञ नहीं हैं, बल्कि सोशल मीडिया की दुनिया में एक रूहानी आवाज के रूप में पहचाने जाते हैं। हाल ही में उनके द्वारा गाया गया नुसरत फतेह अली खान का कलाम 'उनके अंदाज-ए-करम' सोशल मीडिया पर इस कदर छाया कि लाखों लोग उनकी सादगी और सुरों की गहराई के कायल हो गए।

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