बॉलीवुड और साउथ फिल्मों का जॉनर सिर्फ रोमांटिक और हॉरर तक सीमित नहीं है। हॉलीवुड की तरह भारतीय सिनेमा में भी कई ऐसी मूवीज बनी है, जिसमें बिना फिल्टर हिंसा का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, आज भी कुछ फिल्में ऐसी है, जिसमें खूनी खेल और मारधाड़ का तगड़ा लगाया जाता है। 'बागी 4' की तरह इन फिल्मों में भी जबरदस्त एक्शन सीन्स, खून-खराबा और खूंखार आशिक-विलेन की कहानी दिखाई गई है, जिसने दर्शकों को चौंका दिया। अगर आप ऐसा ही कुछ देखना चाहते हैं तो ये फिल्में देख सकते हैं।
सत्या
राम गोपाल वर्मा की इस कल्ट क्लासिक ने मुंबई के अंडरवर्ल्ड डॉन की कहानी को नए तरीके से पेश किया था। इसके साथ ही उन्होंने गैंगस्टर जॉनर की फिल्मों को नई परिभाषा दी। भयावह गोलीबारी, निर्मम हत्याओं और निर्मम सत्ता संघर्षों ने सत्या को एक अविस्मरणीय और हिंसक सिनेमाई अनुभव बना दिया, जिसने बॉलीवुड में अपनी कहानी से तहलका मचा दिया।
मार्को
2024 में रिलीज हुई इस हिंसक फिल्म में शुरू से लेकर अंत तक सिर्फ खूनी खेल देखने को मिला है। जबरदस्त स्टंट, खतरनाक लड़ाई और एक गहरी कहानी के साथ 'मार्को' भारत की सबसे हिंसक फिल्म बन गई। ये फिल्म उन्नी मुकुंदन की है जो बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई।
गैंग्स ऑफ वासेपुर
अनुराग कश्यप की दो पार्ट में रिलीज हुई यह फिल्म पीढ़ियों तक फैले प्रतिशोध और रक्तपात की कहानी थी। क्रूर हत्याओं, गैंगवारों और अभद्र भाषा के साथ यह सबसे हिंसक और प्रशंसित भारतीय फिल्मों में से एक बनी हुई है, जिसकी तुलना अक्सर हॉलीवुड की गॉडफादर से इसकी दमदार कहानी के लिए की जाती है।
एनएच10 (2015)
अनुष्का शर्मा की इस एक्शन-थ्रिलर में अस्तित्व और बदले की एक भयावह रात को दिखाया गया है। फिल्म में हिंसा को बहुत अलग तरीके से पेश किया गया, जिसमें कई हत्याओं का खुलासा होता है।
रक्त चरित्र (2010)
वास्तविक जीवन के राजनीतिक प्रतिशोध पर आधारित राम गोपाल वर्मा की इस फिल्म ने अपने सिर कलम करने, बम विस्फोटों और हत्याओं से दर्शकों को चौंका दिया। दो भागों में रिलीज हुई। इस फिल्म में सत्ता संघर्ष और प्रतिशोध में निहित अत्यधिक हिंसा को दिखाया गया।
किल (2024)
बॉलीवुड की सबसे हिंसक भारतीय फिल्मों में से एक मानी जाने वाली 'किल' में चलती ट्रेन में खतरनाक एक्शन दिखाया। हाथापाई, खूनी खेल और बिना रुके मारधाड़ से दर्शकों का दिमाग हिला दिया था।